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Hanuman Chalisa lyrics in hindi|हनुमान चालीसा 2022

Hanuman chalisa lyrics, हनुमान चालीसा हिंदी में-कई लोग हनुमान चालीसा रोजाना करते हैं।हनुमान चालीसा करने से मन शांत होता हैं।रोजाना हनुमान चालीसा पाठ पढ़ने से दुख, संकट दूर होता हैं।हनुमान जी हमेशा प्रसन्न रहते हैं।

हनुमान चालीसा के अलावा सुन्दरकांड, बजरंग बाण भी कर सकते हैं।बजरंग बाण महिलाएं नही कर सकती हैं वही सुंदरकांड को महिलाएं आसानी से कर सकती हैं।हर मंगलवार को लाल या नारंगी रंग के झंडे जिसमें राम लिखा है उसे हनुमान जी को चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

चलिए हनुमान चालीसा के बारे में कुछ बातें जान लेते हैं।

हनुमान चालीसा के रचयिता तुलसीदास
हनुमान चालीसा कब लिखी गयी 16 Century CE
हनुमान चालीसा किस भाषा में लिखी गई अवधि
हनुमान चालीसा कुल चौपाई 40
हनुमान चालीसा कुल दोहे 3
हनुमान चालीसा पढ़ने का शुभ दिन मंगलवार
हनुमान चालीसा कब पढ़े हनुमान चालीसा आप कभी भी पढ़ सकते हैं।
हनुमान चालीसा मंत्र नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहाः'
क्या बजरंग बाण महिलाएं कर सकती हैं नही
हनुमान जी क्या पसंद हैं

सिन्दूर, तुलसी दल, तील का तेल


Hanuman chalisa lyrics in hindi|हनुमान चालीसा lyrics हिंदी में

इस article में हनुमान चालीसा पाठ U की कोशिश करेंगे जो आप शायद ढूंढ रहे हो।हनुमान जी हर घर में पूजे जाते हैं।हनुमान चालीसा लगभग सभी घरों, और मंदिरों में पढ़ा जाता हैं।

कई लोगों को हनुमान चालीसा याद नही रहता हैं।वे लोग हनुमान चालीसा को online ढूंढते हैं।इसी को देखते हुए हमने आपके लिए हनुमान चालीसा की पूरी पाठ को बतलाने की कोशिश की हैं।

Hanuman chalisa


हनुमान चालीसा दोहा


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार

बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।



चौपाई


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥


राम दूत अतु-लित बलधामा

अंजनिपुत्र पवन सुत नामा॥२॥


महाबीर विक्रम बजरंगी

कुमति-निवार सुमतिके संगी॥३॥


कंचनबरन बिराज सुबेसा

कानन-कुंडल कुँचित केसा॥४॥


हाथबज्र अरु ध्वजा बिराजे

काँधे मूँज जनेऊसाजे॥५॥


शंकरसुवन केसरी नंदन

तेजप्रताप महा जगवंदन॥६॥


विद्यावानगुनी अति चातुर

रामकाज करिबे को आतुर॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मनबसिया॥८॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा

विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे

रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥


लाय सजीवन लखन जियाए

श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा

राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना

लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू

लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही

जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥
 

दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥


राम दुआरे तुम रखवारे

होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना

तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥


आपन तेज सम्हारो आपै

तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥


भूत पिशाच निकट नहि आवै

महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥


नासै रोग हरे सब पीरा

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥


संकट तै हनुमान छुडावै

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥


सब पर राम तपस्वी राजा

तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥


और मनोरथ जो कोई लावै

सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥


चारों जुग परताप तुम्हारा

है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥


साधु संत के तुम रखवारे

असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

अस बर दीन जानकी माता॥३१॥


राम रसायन तुम्हरे पासा

सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥


तुम्हरे भजन राम को पावै

जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥


अंतकाल रघुवरपुर जाई

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥


और देवता चित्त ना धरई

हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥


संकट कटै मिटै सब पीरा

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥


जै-जै-जै हनुमान गुसाईँ

कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥३७॥


जो सतबार पाठ कर कोई

छूटहि बंदि महासुख होई॥३८॥


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा

होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥


तुलसी दास सदा हरिचेरा

कीजैनाथ हृदय महडेरा॥४०॥


Hanuman chalisa Doha

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥


Hanuman chalisa in bengali|বাংলায় হনুমান চালিসা

হনুমান চালিসা দোহা

শ্রী গুরু চরণ সরোজ রাজ নিজ মনু মুকুরু শুদ্ধি৷

বরনৌম রঘুবর বিমল জাসু জো দইকু ফল চারি৷

বুদ্ধিহীন তনু জানিকে, সুমিরন পবন কুমার

বাল বুধি বিদ্যা দেহু মোহি, হরহু কালেশ বিকার৷


মহাপ্রভু হনুমান

জয় কপিস তিহুঁ লোক উন্মোচিত ॥1॥

রামের দূত অটু-আলো বলধামা

অঞ্জনীপুত্র পবন সুত নামা 2

মহাবীর বিক্রম বজরঙ্গী

কুমতি-নিবর সুমতিকে সঙ্গীত৩॥3

কাঞ্চনবরণ বিরাজ সুবেসা

কান-কুণ্ডলী কিভাবে সংকুচিত হয় ॥4॥

হাত বজরা অরু ধ্বজা বিরাজে

কাঁধে মুঞ্জ জানিসাজে ॥5॥

শঙ্করসুবন কেশরী নন্দন

তেজ প্রতাপ মহা জগবন্দন ॥6॥

শিক্ষাগত

রামকাজ করিবে আকুল ॥7॥

আপনি ঈশ্বরের মহিমা শোনার মধ্যে আনন্দিত

রাম লখন সীতা মানবাসিয়া8৷

ভীম রাক্ষসের রূপ ধারণ করলেন

রামচন্দ্রের কাজ সাওয়ারে

আপনার সূক্ষ্ম চেহারা বন্ধ দেখান

বিকট রূপ ধরি লঙ্কা জারওয়া ॥9॥ 

লে সজীবন লখন জীয়ায়

মিঃ রঘুবীর হরষি উর লয়ে ॥11॥

রঘুপতি তার অনেক প্রশংসা করলেন

তুমি মম প্রিয় ভারত-হি সাম ভাই ॥12॥

সহস বদন তুমহারো জাস গাইওয়াই৷

আস কহি শ্রীপতি গলা লাগাই ॥13॥

সনকাদিক ব্রহ্মাদি মুনিসা

নারদ সারদ সহ অহিসা 14

জাম কুবের দিগপাল জাহান তে

কবি কোভিড কোথায় বলতে পারে 15

কেন আপনি কৃতজ্ঞ?

রাম মিলায় রাজ পদ দীন্হা 16

তুমি বিভীষণ মন্ত্র মনে কর

লঙ্কেশ্বর ভায়ে সব জগ জানা17

জগ সহস্ত্র জোজনে ভানু

লিলিও তাহি মিষ্টি ফল জানু18৷

প্রভু মুদ্রিকা মেলি মুখ মাহি৷

আশ্চর্যের কিছু নেই যে তিনি জল  অতিক্রম করেছেন

দুর্গম কাজ জগৎ

সহজ কৃপা তোমারে ॥20॥

ভগবান রাম আমাদের রক্ষা করেন

গরম না আদন্য বিনু পয়সারে21॥

সব সুখ তোমার মাথায়

তুমি ভয় কর রক্ষক কাহু ॥22॥

আপনি দ্রুত প্রশংসা

ত্রয়ো লোক হাঙ্ক তয় কাপাই ॥23॥

ভূত ভ্যাম্পায়ার কাছে আসবে না

নাম শুনলে মহাবীর ॥24॥

নাসাই রোগ হরে সব পিরা

জপ অবিরত হনুমত বিরা ॥25॥

সংকত তাই হনুমান চুদাভাই৷

মন অনুক্রম, শব্দ ধ্যান, যা লাভই ॥26॥

রাম তপস্বী রাজা সবার উপরে

খড় কবজা স্থূল তুমি সাজা 27

এবং কে তাই কখনও আকাঙ্ক্ষা আনা

সোই অমিত জীবন ফল পাবই 28

চার যুগ জুড়েই তোমার মহিমা

বিখ্যাত বিশ্ব আলো 29

আপনি সাধক এবং স্টৌকদের তত্ত্বাবধায়ক

অসুর নিকন্দন রাম দুলারে 30 

অষ্ট সিদ্ধি নয় নিধির দাতা

আস বার দিন জানকী মাতা৷ 31

রাম রসায়ন তুমহে পাশা

সর্বদা রঘুপতির দাস হও ॥32॥

আপনার প্রার্থনা প্রভু রামের কাছে পৌঁছায়

জনম জনম কে দুঃখ বিসরাওয়াই 33

অবশেষে গেল রঘুবরপুরে

হরি ভক্তের জন্ম কোথায় 34

আর দেবতা ধরেননি

হনুমত সাঁই করিল সব সুখ ॥35॥

সমস্ত বিপদ দূর হয়ে যাবে এবং সমস্ত ব্যথা অদৃশ্য হয়ে যাবে

জো সুমিরই হনুমত বলবীর 36

জয় জয় জয় হনুমান গুসাইন

দয়া কর গুরুদেব ॥37॥

যে ব্যক্তি এটি 100 বার পড়বে

ছুহি বন্দি মহাসুখ হোই 38

যারা এই হনুমান চালিসা পাঠ করেন

হোয় সিদ্ধ সখি গৌরীসা 39

তুলসী দাস সদা হরিছেরা

কেজাইনাথ হৃদয় মহদের ॥40॥

Hanuman chalisa in Marathi|हनुमान चालिसा


हनुमानाचा जयजयकार

जय कपीस तिहूं लोक उघड ॥१॥

रामाचा दूत अत्तू-प्रकाशित बालधामा

अंजनीपुत्र पवन सुत नामा॥2॥

महाबीर विक्रम बजरंगी

कुमति-निवार सुमतीके संगती ॥३॥

कांचनबरन बिराज सुबेसा

कानाची कुंडली कशी संकुचित आहे ॥4॥

हात बाजरी अरु ध्वजा बिराजे

खांदे मूंज जनेयुसाजे ॥5॥

शंकरसुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जगवंदन ॥6॥

शैक्षणिक

करिबे आतुर रामकज ॥7॥

देवाचे गौरव ऐकण्यात तुम्हाला आनंद होतो

राम लखन सीता मानबसीया। 8 ॥

आपले सूक्ष्म स्वरूप दाखवा

विकट रूप धरी लंका जरावा ॥9॥

भीमाने राक्षसाचे रूप घेतले

रामचंद्राचे काज सवरे ॥10॥

ले सजीवन लखन जिये

श्री रघुबीर हर्षी उर लाये ॥11॥

रघुपतीने त्याची खूप स्तुती केली

तू मम प्रिय भरत-ही सम भाई ॥12॥

सहस बदन तुम्हारो जस गायवाई

जैसा काहि श्रीपती कंठ लावाई ॥13॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनिसा

अहिसा नारद सारदांसह ॥14॥

जाम कुबेर दिग्पाल जहाँ ते

कवी कोविड म्हणे कोठे ॥१५॥

तू कृतज्ञ का आहेस?

राम मिले राज पद दीन्हा ॥16॥

तूं मंत्र बिभीषण मानिला

लंकेश्वर भाये सब जग जाना॥17॥

जुग सहस्त्र जोजन वर भानु

लिलयो ताही गोड फळ जानु ॥18॥

प्रभू मुद्रिका मेली मुख माही

त्याने पाणी ओलांडले यात आश्चर्य नाही॥19॥

दुर्गम काज जग

सहज कृपा तुझी ॥20॥

भगवान राम आमचे रक्षण करतात

होत ना आडन्या बिना पैसारे 21॥

सर्व सुख तुझें मस्तक

तूं रक्षणकर्ता भय ॥22॥

जलद तुमची स्तुती करा

त्रिकूट लोक हांक तै कपाय ॥23॥

भूत पिशाच जवळ येऊ नका

नाम ऐकतां महावीर ॥24॥

नसै रोग हरे सब पिरा

अखंड जप करा हनुमत बिरा ॥25॥

संकट ताई हनुमान चुडावई

मन क्रम, शब्द ध्यान, जो लावई ॥26॥

राम तपस्वी राजा सर्वांवर

 बिजागर स्थूल आपण सजा॥27॥

आणि म्हणून कोण कधी इच्छा आणते

सोई अमित जीवन फल पावई ॥28॥

तुझे वैभव चारही युगात आहे

तो प्रसिद्ध जागतिक प्रकाश आहे॥29॥

तुम्ही संत आणि स्तब्धांचे पालनकर्ते आहात

असुर निकंदन राम दुलारे ॥30॥

अष्ट सिद्धी नऊ निधीचा दाता

जैसा बर दीन जानकी माता ॥31॥

राम रसायन तुम्हे फासे

सदा रघुपतीचा सेवक हो ॥32॥

तुमची प्रार्थना प्रभू रामापर्यंत पोहोचते

जनम जनम के दुःख बिसरवाई 33

शेवटी रघुवरपूरला गेले

हरिच्या भक्ताचा जन्म कोठे 34

आणि देवता धरली नाही

हनुमत साईं केलें सर्व सुख ॥35॥

सर्व धोके दूर होतील आणि सर्व वेदना अदृश्य होतील

जो सुमिराय हनुमत बलबिरा॥36॥

जय जय जय हनुमान गुसाईं

कृपा करावी गुरुदेव ॥37॥

जो 100 वेळा पाठ करतो

सोडी बंदि महासुख होई ॥38॥

ज्यांनी ही हनुमान चालीसा वाचली

होई सिद्ध सखी गौरीसा॥39॥

तुलसीदास सदा हरिचेरा

केजयनाथ हृदय महदेरा ॥40॥

Hanuman chalisa in gujarati|હનુમાન ચાલીસા


હનુમાનજીની જય

જય કપિસ તિહુન લોક ઉજાગર ॥1॥


રામના દૂત અત્તુ-પ્રકાશિત બલધામ

અંજનીપુત્ર પવન સુત નામા॥2॥


મહાબીર વિક્રમ બજરંગી

જે દુષ્ટ વિચારને દૂર કરે છે અને ઉમદાનો સાથ આપે છે॥3॥


કંચનબરન બિરાજ સુબેસા

કાનની કોઇલ કેવી રીતે સંકુચિત થાય છે ॥4॥


હાથ બાજરા અરુ ધ્વજા બિરાજે

ઊભા મૂંજ જનેયુસજે॥5॥


શંકરસુવન કેસરી નંદન

તેજ પ્રતાપ મહા જગવંદન॥6॥


શૈક્ષણિક

રામકાજ કરીબેને આતુર છે॥7॥


તમે ભગવાનના મહિમા સાંભળવામાં આનંદ કરો છો

રામ લખન સીતા મનબસિયા॥8॥


તમારા સૂક્ષ્મ દેખાવને બતાવો
વિકટ રૂપ ધરિ લંકા જરાવા॥9॥


ભીમે રાક્ષસનું રૂપ ધારણ કર્યું

રામચંદ્રના કાજ સાવરે॥10॥


લે સજીવન લખન જીયાયે

મિસ્ટર રઘુબીર હરસિ ઔર લે॥11॥


રઘુપતિએ તેમની ખૂબ પ્રશંસા કરી

તમે મમ ડિયર ભરત-હી સામ ભાઈ॥12॥


સહસ બદન તુમ્હારો જસ ગવાઈ

જેમ કહિ શ્રીપતિને ગળા છે॥13॥


સનકાદિક બ્રહ્માદિ મુનિસા

નારદ સારદ સાથે અહિસા॥14॥


જમ કુબેર દિગપાલ જહાં તે

કવિ કોવિદ ક્યાં કહી શકે?॥15॥


શા માટે તમે આભારી છો?

રામ મિલય રાજ ​​પદ દીન્હા॥16॥


તેં મંત્ર બિભીષણ ગણ્યો

લંકેશ્વર ભયે સબ જગ જાને॥17॥


જુગ સહસ્ત્ર જોજન પર ભાનુ

લીલ્યો તાહિ મધુર ફળ જાનુ॥18॥


પ્રભુ મુદ્રિકા મેલી મુખ માહી

કોઈ આશ્ચર્ય નથી કે તેણે પાણી પાર કર્યું ॥19॥
 

દુર્ગમ કાજ વિશ્વ

તમારા માટે સરળ કૃપા॥20॥


ભગવાન રામ આપણું રક્ષણ કરે છે

હોટ ના આદના બિનુ પૈસારે॥21॥


બધા સુખ તમારા માથા છે

તું રક્ષક કહુ ડરતો॥22॥


ઝડપથી તમારી પ્રશંસા કરો

ત્રિકુટ લોક હાંક તાઈ કપાય॥23॥


ભૂત વેમ્પાયર નજીક ન આવે

મહાવીર જ્યારે નામ સાંભળે છે॥24॥


નાસાઈ રોગ હરે સબ પીરા

જપ નિરંતર હનુમત બીરા ॥25॥


સંકટ તાઈ હનુમાન છુડાવઈ

મન ક્રમ, શબ્દ ધ્યાન, જે લાવાઈ ॥26॥


રામ તપસ્વી રાજા સર્વ ઉપર

સ્ટ્રોઝ મિજાગરું સ્થૂળ તમે સાજા॥27॥


અને જે ક્યારેય ઈચ્છા લાવે છે

સોઇ અમિત જીવન ફલ પાવઇ॥28॥


તમારો વૈભવ ચારેય યુગમાં છે

તે પ્રખ્યાત વિશ્વ પ્રકાશ છે॥29॥


તમે સંતો અને સંતોના રખેવાળ છો

અસુર નિકંદન રામ દુલારે ॥30॥


અષ્ટ સિદ્ધિ નવ નિધિના દાતા

અસ બાર દિન જાનકી માતા ॥31॥


રામ રસાયણ તુમ્હે પાસા

સદા રઘુપતિના સેવક રહો ॥32॥


તમારી પ્રાર્થના ભગવાન રામ સુધી પહોંચે

જનમ જનમ કે દુખ બિસરવાઈ॥33॥


છેવટે રઘુવરપુર ગયા

જ્યાં હરિના ભક્તનો જન્મ થયો॥34॥


અને દેવતા પકડી ન હતી

હનુમત સાંઇ સર્વ સુખ કર્યું ॥35॥


બધા જોખમો દૂર થઈ જશે અને બધી પીડા અદૃશ્ય થઈ જશે
જો સુમિરાઈ હનુમત બલબીરા॥36॥


જય જય જય હનુમાન ગુસાં

ગુરુદેવ પર કૃપા કરો ॥37॥


જે 100 વાર તેનો પાઠ કરે છે

છુહિ બંદી મહાસુખ હોઈ॥38॥


જેણે આ હનુમાન ચાલીસા વાંચી

હોય સિદ્ધ સખી ગૌરીસા॥39॥


તુલસી દાસ સદા હરિચેરા

કેજનાથ હૃદય મહડેરા ॥40॥

हनुमान चालीसा का अर्थ हिंदी में|Hanuman chalisa meaning in hindi

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार|
बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि|
बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार|
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार||

अर्थ- पहले पंक्ति का मतलब हैं कि तुलसीदास जी हनुमान जी की वंदना करने से पहले अपने दोष और गलती की माफी मांग रहे हैं।गुरु जी के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करता हूँ और फिर रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करने जा रहा हूं, जो की चारों फल( धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) की प्राप्ति कराने वाले है।


अर्थ-दूसरे पंक्ति में तुलसीदास जी से कह रहे हैं कि हे पवन कुमार!मैं आपके सामने सुमिरन कर रहा हूं।आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल व कमजोर है। मुझे शारीरिक शक्ति प्रदान कीजिये, सद्‍बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कीजिये।

।।चौपाई।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर|
रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा||2||

अर्थ- हनुमान जी, आपकी जय हो, आपके पास ज्ञान और गुण का भंडार है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोक , स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आप पूजनीय हो।हे पवनसुत अंजनी पुत्र, आपके जैसा बलवान दूजा कोई नहीं हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी|
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा||4|

अर्थ- हे बजरंग बली, आप विशेष पराक्रम शक्ति वाले हो। आप विनाशी बुद्धि को नष्ट करने वाले हो, और सधबुद्धि वालों के साथी, सहायक हो।सुनहरे रंग, कानों में कुण्डल, सुंदर वस्त्र और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे|
शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन||6||

अर्थ- आपके हस्त में बज्र और ध्वजा है और कांधे पर मूंज जनेऊ ने सुशोभित कर रखा है। आप शंकर के अवतार हो! हे केसरी नंदन आपकी तेज पराक्रम और महान यश को पूरे संसार भर में जाना जाता है।

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर|
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया||8||

अर्थ- आपके पास प्रकण्ड विद्या का निधान है, गुणवान और अति कुशल होकर राम के काज के लिए आतुर रहते हो। आप श्री राम चरित सुनने में आनन्द रस लेते है।भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण आपके हृदय में बसे है।

सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा|
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे||10||

अर्थ- अपना सूक्ष्म रूप धारण करके माता सीता को दिखाया और अपने भयंकर रूप से लंका को जलाया।आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्‍देश्यों को सफल कराया।

लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये|
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई||12||

अर्थ- संजीवनी बूटी लाकर आपने लक्ष्मण जी को बचाया जिसके कारण भगवान राम ने खुश होकर आपको हृदय से लगाया।भगवान रामचन्द्र ने आपकी प्रशंसा करते हुए कहा कि तुम मेरे प्यारे भाई भरत जैसे हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें|
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा||14||

Meaning|अर्थ- श्री राम जी ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की आपका यश हजार मुख से ज्यादा सराहनीय है।सनक, सनातन, सनन्दन, सनत्कुमार, मुनि, ब्रह्मा ,नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सभी आपका गुणगान करती है।

जम कुबेर दिगपाल कहां ते कबि कोबिद कहि सके कहां ते|
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा||16||

Meaning|अर्थ- यमराज, कुबेर सभी दिशाओं के रक्षक, विद्वान, पंडित कवि या कोई भी आपके यश का पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते। आपने सुग्रीव जी को भगवान राम से मिलाकर ऐसा उपकार किया, जिसकी वजह से वे राजा बने।

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना|
जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु||18|

Meaning|अर्थ- आपके उपदेश को  विभिषण जी ने भली भांति पालन किया जिसकी वजह से वह लंका के राजा बने, इसको संसार अच्छी तरह से जानता है।सूर्य जो कि इतने योजन दूरी पर मौजूद है वहाँ पहुंचने के लिए हजार युग लगते हैं।इतनी लंबी दो हजार योजन की दूरी में पहुँचकर आपने सूर्य को एक मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लांघ गये अचरज नाहिं|
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते||20||

Meaning|अर्थ- आपने रामचन्द्र जी के अंगूठी को मुंह में रखकर पूरे समुद्र को लांघ लिया, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ तो फिर संसार में जितने भी कठिन कार्य हो, वो आपकी कृपा से सहज बन जाते है।

राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे|
सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना||22||

Meaning|अर्थ- भगवान राम के द्वार के आप रखवाले है, जहाँ आपकी आज्ञा के बिना कोई प्रवेश भी नहीं कर सकता हैं।इसका अर्थ है कि आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा पूरी तरह दुर्लभ है।जो कोई भी आपके शरण में आता है, उन सभी को आनन्द प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी को डरने की जरूरत ही क्यों।

आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हांक ते कांपे|
भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें||24||

Meaning|अर्थ- आपके अलावा आपके गति को कोई नहीं रोक सकता, आपके गर्जन से तीनों लोक कांप उठते है।जहां महावीर (हनुमान) का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच निकट भी नही आते हैं।

नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा|
संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें||26||

Meaning|अर्थ- हे वीर हनुमान! आपकी निरंतर जाप करने से सभी रोग दूर हो जाते है और सब पीड़ा खत्म हो जाती है। हे हनुमान जी!जिनका भी विचार करने समय , कर्म करने समय और बोलने समय ध्यान आपकी तरफ रहता है, उनकी सारी संकटों का आप निवारण करते है।

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा|
और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे||28||

Meaning|अर्थ- तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र सबसे श्रेष्ठ है, उनके सभी कार्यों को आपने सहज दिया। जिस पर आपकी दया कृपा होगी, उसे सभी मनोकामनाओ का फल जरूर मिलता है जिसकी कोई सीमा नहीं होती हैं।

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा|
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे||30||

Meaning|अर्थ- चारो युग (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग) में आपका यश फैला है, जगत में आपकी कीर्ति सभी जगह प्रकाशमान रहेगी।राम के दुलारे! आप अच्छे की रक्षा करने और दुष्टों का नाश करने वाले है।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता|
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा||32||

Meaning|अर्थ- हे हनुमान आपको माता जानकी से वरदान मिला है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौवों निधियां दे सकते है।आप हमेशा श्री रघुनाथ के शरण में रहते है, जिसके कारण आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम की औषधि मौजूद है।

तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें|
अन्त काल रघुबर पुर जाई जहां जन्म हरि भक्त कहाई||34||

Meaning|अर्थ- आपके भजन से भगवान राम की प्राप्ति होती है और जन्म जन्म के दुख दूर हो जाते है।अंत समय में रघुनाथ जी के धाम को जाएंगे और यदि दुबारा जन्म लेंगे तो आपकी भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।

और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई |
संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा ||36||

Meaning|अर्थ- हे हनुमान! आपकी सेवा करने पर सभी तरह की सुख की प्राप्ति होगी।किसी अन्य देवता की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं। हे हनुमान जी, जो आपको पूजता है, उसके सारे संकट दूर हो जाते है और सब पीड़ा खत्म हो जाते है।

जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं|
जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई||38||

Meaning|अर्थ- हे हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु के समान कृपा कीजिए।जो कोई भी हनुमान चालीसा पाठ को सौ बार करेगा उन्हें सभी बाधावो से छुटकारा मिल जाएगा और सुख हासिल होगा।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा|
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मंह डेरा||40||

अर्थ-  जो कोई भी हनुमान चालीसा पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी। हैं हनुमान जी! तुलसीदास जी सदैव श्री राम के दास रह चुके।इसलिए आप उनके हृदय में निवास कीजिए।

।।दोहा।।

पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप|
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप||

अर्थ- हे संकट मोचन पवन कुमार, आप आनंद मंगलों के स्वरूप हो। हे हनुमान! आप भगवान राम, माता सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास करें।

हनुमान चालीसा पाठ पढ़ने की विधि|hanuman chalisa padhne ki vidhi

  1. सुबह स्नान करके
  2. साफ सुथरे वस्त्र को पहन ले।
  3. Face को पूर्व या दक्षिण दिशा में रखें
  4. आसन में लाल कपड़े का इस्तेमाल करें।
  5. हनुमान जी की प्रतिमा को लाल वस्त्र के ऊपर पूर्व दिशा या दक्षिण दिशा में रखे
  6. शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं
  7. शुद्ध जल भरा बर्तन सामने रखें
  8. अब हनुमान जी के प्रतिमा के  सामने 3 बार हनुमान चालीसा का पाठ पढ़े।
  9. अब हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाएं।
  10. हर मंगलवार 11 से 21 दिन तक हनुमान चालीसा का पाठ इस तरह से करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

हनुमान चालीसा पाठ करने के फायदे|Benifits of hanuman  chalisa 

  1. रोजाना हनुमान चालीसा पाठ करने से शनिदेव हमेशा प्रसन्न रहते हैं।
  2. महादशा से पीड़ित के लिए हनुमान चालीसा पाठ लाभदायक माना जाता है।
  3. मंगलवार को हनुमान चालीसा पाठ करने से घर में सुख समृद्धि में बढ़ौतरी होती हैं।
  4. मांगलिक दोष कुंडली वालो के लिए हनुमान चालीसा पाठ अतिलाभदायक साबित होने वाला है।
  5. मन शांति, सुख समृद्धि पाने के लिए हनुमान चालीसा पाठ अवश्य करें।

Hanuman images|हनुमान जी तस्वीर

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हनुमान जी के चमत्कारी मंत्र:जाने सारे मंत्र

हनुमान जी को मनाने के लिए ,उन्हें प्रभावित करने के लिए यह मंत्र बहुत ही कारगर साबित होने वाली हैं।इन मंत्रों का वंदन करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। 
  1. ॐ हं हनुमते नम:।
  2. ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा।'
  3. ॐ नमो भगवते हनुमते नम:।
  4. 'ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा
  5. ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्।
  6. ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।
  7. दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।'
  8. और मनोरथ जो कोई लावै,सोई अमित जीवन फल पावै।' 

Frequently asked questions[FAQ]

Who wrote hanuman chalisa|हनुमान चालीसा किसने लिखा?
Tulsidas

When was hanuman chalisa written|हनुमान चालीसा कब लिखा गया था?
16th century CE

How to learn hanuman chalisa|हनुमान चालीसा कैसे याद करें?
हनुमान चालीसा याद करने का सबसे बेहतरीन तरीके हैं की चालीसा को हर रोज सुबह शाम पढ़े।

हनुमान चालीसा का सिद्धि कैसे करें?
हनुमान चालीसा के सिद्धि के लिए  108 बार पाठ करने की जरूरत हैं। आप हनुमान चालीसा पढ़ते जाएं और हर एक बार पाठ पूर्ण होने के बाद एक चना या रेवड़ी हनुमानजी के यन्त्र/चित्र/विग्रह को समर्पित करते जाएं। ... यह साधना 21 दिनों की है। साधक या तो लगातार 21 दिनों तक प्रतिदिन यह साधना करे या हर मंगलवार को कुल 21 मंगलवार तक यह साधना करे।

हनुमान चालीसा के चमत्कार
हनुमान चालीसा पढ़ने से मन शांत, सभी तरह के संकट का निवारण होने लगता हैं।ऐसा कहा जाता हैं कि यदि कोई सच्चे मन से हनुमान जी वंदना करता हैं तो उसके जीवन कि सभी परेशानिया दूर हो जाती हैं।

हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय
हर मंगलवार को लगभग चालीस दिनों तक सूर्योदय से पहले मतलब सुबह चार बजे को हनुमान चालीसा के पाठ पढ़ने से जीवन में परिवर्तन दिखने लग जाएगा।


हनुमान चालीसा किताब कहा से खरीदे?
हनुमान चालीसा किताब को आप किसी भी online site जैसे कि amazon, flipkart  से आसानी से मंगवा सकते हो।

सात बार हनुमान चालीसा का पाठ के फायदे
रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ने के कई सारे फायदे हैं जैसे कि आत्मविश्वास में वृद्धि, भय से मुक्ति, आर्थिक समस्याओं से छुटकारा, रोग मुक्ति, मनोकामना पूरी, कार्य में किसी तरह की परेशानी नही आती हैं।


हनुमान चालीसा कैसे पढ़ते हैं
रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ने के कई सारे फायदे हैं जैसे कि आत्मविश्वास में वृद्धि, भय से मुक्ति, आर्थिक समस्याओं से छुटकारा, रोग मुक्ति, मनोकामना पूरी, कार्य में किसी तरह की परेशानी नही आती हैं।

हनुमान चालीसा कब पढ़ना चाहिए?
हनुमान चालीसा को मंगलवार या शनिवार को शुरू करना चाहिए और नियमित चालीस दिनों तक पढ़ना चाहिए।

हनुमान चालीसा का दोहा
श्री हनुमान चालीसा का दोहा कुछ इस तरह हैं।

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई?
किंवदंती के बताया था कि जब तुलसीदास जी इसका वाचन कर रहे थे  तो हनुमान जी खुद एक बुजुर्ग के भेष। में इसे सुनने के लिए आए थे। किंवदंती के अनुसार,  तुलसीदास जी अपने कारावास में अवधी भाषा में हनुमान चालीसा का वाचन किया था।

हनुमान चालीसा में कितने दोहे हैं?
श्री हनुमान चालीसा में आपकों  3 दोहे और 40 चौपाई देखने को मिलेगी।


हरिहरन श्री हनुमान चालीसा कलाकार?
हरिहरन श्री हनुमान चालीसा में हरिहरन गायक और गुलशन कुमार कलाकार थे।

हनुमान चालीसा 7 बार पढ़ने से क्या होता हैं?
अगर कोई हनुमान चालीसा पाठ को लगातार 7 दिनों तक हर रोज 7 बार उगते सूर्य के सामने या भगवान राम की प्रतिमा के सामने हनुमान चालीसा पाठ करता हैं तो  उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

हनुमान चालीसा कितने बजे पढ़ना चाहिए?
मंगलवार या शनिवार को शुरू करके 40 दिनो तक नियमित रूप से हनुमान चालीसा पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।लेकिन इस कार्य को प्रातः काल मतलब सूरज निकलने से पहले यानि कि सुबह 4 बजे शुरू करने से काम सफल होता हैं।

हनुमान चालीसा 21 बार पढ़ने से क्या होता हैं?
हनुमान चालीसा पाठ करने से सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा पाठ बहुत ही लाभदायक हैं।हनुमान चालीसा पाठ से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।21 दिनों तक हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।हनुमान चालीसा पाठ पढ़ने से अपने में आत्मविश्वास आता हैं। 

हनुमान चालीसा 108 बार पढ़ने से क्या होता हैं?
हर रोज यदि 108 बार महिलाए इन चौपाइयों को पढ़ती है तो दुःख दर्द दूर होता हैं।धन में वृद्धि होती हैं।बुद्धि और आत्मिविश्वास में विकास होता हैं।

हनुमान जी की पूजा का सही समय क्या है?
मंगलवार को हनुमान पूजन बहुत ही शुभ माना जाता हैं।मंगलवार दिन को सूरज उगने के बाद और शाम को सूरज डूबने के बाद हनुमान चालीसा पाठ कर सकते हैं।सही विधि विधान के साथ हनुमान जी को मंगलवार को पूजने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्या फायदा होता है?
रोजाना हनुमान चालीसा पाठ करने से दुख दर्द दूर होता हैं।आत्मविश्वास में वृद्धि होता हैं।धन संपत्ति में वृद्धि होती हैं।

सुंदरकांड का पाठ कितने बजे करना चाहिए?
सुबह या शाम को 4 बजे के बाद सुंदरकांड का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता हैं।आप किसी भी दिन सुंदरकांड पाठ करना शुरू कर सकते हैं लेकिन मंगलवार और शनिवार काफी शुभ माना जाता हैं।

बजरंग बाण पाठ कितनी बार करना चाहिए?
बजरंग बाण पाठ को आप जितनी चाहे उतनी बार कर सकते हो।इसकी कोई गिनती नही हैं लेकिन जब भी करें पूरे दिल से करें।बजरंग बाण का पाठ को आप दिन में दो बार भी कर सकते हैं।बजरंग बाण के पाठ को मंगलवार या शनिवार को करे तो अतिलाभदायक साबित होता हैं।बजरंग बाण पाठ करने से पहले कई चीज़ों का ध्यान रखना होता हैं जैसे की non veg छोड़ना होगा, मन साफ होना चाहिए।
बजरंग बाण पाठ को आप 11, 21 और 40 दिनों का संकल्प ले सकते हैं।

हनुमान जी खुश होने पर क्या संकेत देते हैं?
अगर किसी भी तरह का शनि पीड़ा असर नहीं हो रहा है तो इसका सीधा सीधा मतलब हैं की हनुमान जी आप से खुश हैं।यदि आप किसी से झूठ नहीं बोल रहे हो, सभी से प्रेम भाव रखने की कोशिश कर रहे हो ,दूसरे के साथ किसी भी तरह के विवाद में नहीं उलझ रहे हो तो इसका सीधा संकेत है कि हनुमान जी आपसे बहुत ही ज्यादा प्रसन्न हैं।

हनुमान जी का कौन सा मंत्र?
इन मंत्रों का उच्चारण से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और जल्दी सुनते है।
'नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहाः'

सुंदरकांड करने से क्या फल मिलता है?
सुंदरकांड पाठ करने से शक्ति प्रदान होता हैं।आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता हैं।ऐसा माना जाता है कि जब आत्मविश्वास कम होने लग जाए और परेशानियां बढ़ जाए, तो सुंदरकांड का पाठ करना अति लाभदायक होता है।सुन्दकांड पाठ करने से सब कुछ अच्छा होने लगता हैं।महिलाएं बजरंग बाण का पाठ कर सकती है क्या?

महिलाएं बजरंग बाण का पाठ क्यों नहीं कर सकती?
हनुमान चालीसा,सुंदरकांड, संकट मोचन, हनुमानाष्टक आदि पाठ महिलाएं आसानी से कर सकती हैं लेकिन बजरंग बाण का पाठ करना वंचित हैं।महिलाएं हनुमान जी को चरणपादुकाएं अर्पित, पंचामृत स्नान नहीं कर सकती हैं इसलिए बजरंग बाण पाठ करना इनलोगों के लिए उपयुक्त नही हैं।

मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से क्या होता है?
हनुमान जी को सिंन्दूर का चोला या फिर सिन्दूर चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।ऐसा माना जाता है कि जब माता सीता सिंदुर लगा रही थी तभी हनुमान जी पहुँचे और माता सीता से पूछने लगे कि माता आप सिंदूर क्यों  लगा रही हो।उसी समय माता सीता ने जवाब दिया, माता ने हनुमान जी से कहा सिंदुर लगाने से भगवान राम का स्नेह प्राप्त होता हैं।तभी से हनुमान जी  को सिंदूर प्रिय बन गया।यदि मंगलवार को सिंदूर का त्रिकोणीय चोला जिसमे राम लिखा हो वो चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

सपने में हनुमान जी का मंदिर देखना क्या होता है?
सपने में हनुमान जी के मंदिर का दर्शन होना एक शुभ संकेत हैं।आपके साथ कुछ शुभ घटित होने वाला हैं।स्वप्न में मंदिर का दर्शन होने का मतलब है की आपके मनोकामनाएं जल्द ही पूरी होगी।
यदि कोई हनुमान भक्त मंदिर का स्वप्न करता हैं तो उसकी सारी भक्ति भावना में बढ़ोतरी होती हैं।उसके आध्यात्मिक विकास में परिवर्तन होता है


भूत हनुमान जी से क्यों डरते हैं?
हनुमान चालीसा में इस चौपाई को तो अवश्य सुना होगा।'भूत पिसाच निकट नही आवे, महावीर जब नाम सुनावे'।इस पंक्तियों का साफ मतलब हैं कि जहाँ भी हनमान जी का नाम लिया जाएगा वहां भूत पिसाच कभी नही आएंगे।हनुमान जी के नाम से ही भूत पिशाच भागने लगते हैं।


हनुमान जी की उपासना कैसे की जाती है?
यदि हनुमान जी उपासना करना चाहते हो तो सबसे पहले ईशान कोण साफ कर उसपर चौकी स्थापित करें।चौकी के ऊपर लाल वस्त्र बिछाएं।लाल वस्त्र बिछाने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा को रखे और अब भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा रखें।ये सबकुछ करने के बाद शुद्ध घी का दीपक , धूप जलाकर सुंदर कांड पाठ को शुरू करें।ध्यान रहे कि हनुमान जी के मंत्रों का जाप अवश्य करें।

बजरंगबली को कैसे प्रसन्न करें?
मंगलवार को हनुमान जी को इत्र(केवड़ा का) एवं गुलाब की माला चढ़ाना अत्यंत लाभकारी माना जाता हैं।यह ध्यान रहे की खुद लाल रंग के वस्त्र पहनें, धन की प्राप्ति के लिए और हनुमान जी को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल उपाय है।

हनुमान जी को प्रसाद में क्या पसंद है?
बादाम, काजू,छुआरा, खोपरागिट,किशमिश पंचमेवा के प्रसाद चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। 

हनुमान जी को क्या भोग लगाएं?
हनुमान जी को लड्डू का भोग चढ़ाना अत्यंत लाभकारी माना जाता हैं।बेसन की लडडू,मोतीचूर की लड्डू में से आप किसी को भी चढ़ा  सकते हैं।मंगलवार को लड्डू चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

हनुमान जी को सबसे प्रिय क्या है?
हनुमान जो को तुलसी , सिन्दूर (नारंगी रंग) , चमेली के तेल, लाल या नारंगी झंडे काफी पसंद हैं।यदि मंगलवार को हनुमान जी को ये सब चढ़ाएंगे तो हनुमान जी प्रसन्न होंगे और आपके सारे संकट दुख-दर्द धीरे धीरे कम होने लग जाएंगे।
माना जाता है कि मंगलवार को चमेली के तेल का दिया जलाने से सारे संकट दूर हो जाते हैं।लाल या नारंगी ध्वज जिसपर राम लिखा हो वह अगर मंगलवार को हनुमान जी को चढ़ाया जाए तो धन-संपत्ति में वृद्धि होती हैं।

हनुमान जी को तुलसी क्यों चढ़ाते हैं?
हनुमान जी को तुलसी चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं।यदि मंगलवार को तुलसी के पत्ते हनुमान जी को अर्पित करें तो घर में सुख समृद्धि का वास होता हैं।

हनुमान जी को बुलाने का मंत्र क्या है?
इस चमत्कारी मंत्र का वाचन करने हनुमान जी तुरंत प्रकट होएंगे।जाने इस मंत्र को
कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु , निर्मुक्तेर कालेत्वम अमरिष्णु।।

Hanuman chalisa video[हनुमान चालीसा वीडियो]



Conclusion

इस article में हमने हनुमान चालीसा के बारे में विस्तार से बतलाने की कोशिश की हैं।यदि आपको यह article पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।

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