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Short Moral Stories in Hindi|नैतिक कहानियाँ हिंदी में

आज हमलोग इस लेख में moral stories in hindi से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कहानियाँ आपके सामने प्रस्तुत करने वाले हैं।Moral stories ऐसे होने चाहिए जो लोगों में positive अनुभूति पैदा कर सके और लोंगो को सही mindset तैयार करने में मदद करें।

नैतिकता पर आधारित कहानियॉ हमें सही राह और गलत राह को चुनने में मदद करते हैं।एक अच्छे और गुणवान व्यक्ति बनने से पहले जीवन की नैतिकता के बारे में जानना अति आवश्यक हैं।छोटे बच्चे अपने जीवन की शुरुवात करने से पहले जीवन परिचय के बारे में ज्ञान होना अतिआवश्यक हैं।

आज हमलोग यहां पर नैतिकता पर आधारित कहानियों का संग्रह को प्रस्तुत करने वाले हैं।इस कहानियों के माध्यम सेे बच्चों में नैतिक शिक्षा के साथ साथ नवाचार और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करेगा।चलिए short moral stories in hindi से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण कहानियों को देखते हैं।

Short Moral stories in hindi for kids in 2022

आज हम best of the best moral stories आपके पास लाए हैं।इन stories को पढ़कर काफी आनंद भी आएगा साथ ही जीवन की कुछ नैतिकता के बारे में भी पता चलेगा।

एक अच्छे जीवन की शुरुवात तभी होती हैं जब आप एक अच्छे moral के साथ अपना जीवन व्यतीत करना शुरू करते हैं।जीवन तो तभी जीते हैं लेकिन एक अच्छा जीवन वही जीता हैं जिनके सिद्धान्त काफी positive हो।

Moral stories in hindi


यहाँ नीचे आपके लिए कुछ बेहतरीन कहानियों का संग्रह लेकर आए हैं जिसकों पढ़ने के बाद आपकों काफी ज्ञान मिलेगा।जीवन की नैतिकता के बारे में पता चलेगा।चलिए इन कहानियों को अच्छे से देखते हैं।

बाज़ और चिड़िया (Short Moral stories in hindi)

बहुत समय पहले की बात है।चंपकवन जंगल में सभी पक्षियां आपस में मिल-जूलकर रहा करते थे।उस समय बड़े पक्षी छोटे पक्षियों के साथ मित्रता का व्यवहार किया करते थे।उस चंपकवन के जंगल में एक बाज रहता था।एक दिन वह सवेरे-सवेरे उड़ रहा था।उस समय एक पेड़ पर हिलती हुई एक लाल रंग का वस्तु दिखाई दिया।उस लाल रंग को देखकर बाज डर गया।

Moral stories in hindi


बाज अपने जीवनकाल में इस तरह के रंगीन वस्तु को पहले कभी नहीं देखा था।उसने किसी तरह से हिम्मत जुटाकर उसके पास पहुंचा।उसके पास पहुँचने के बाद उसमें कोई हरकत नहीं बाज को किसी तरह की हरकत नहीं दिखी।इस कारण बाज का हिम्मत ओर बढ़ गया।फिर वह आगे बढ़कर बंधी हुई रस्सी को अपने पंजें से छूकर देखा तो बाज को किसी तरह का कोई हरकत महसूस नहीं हुआं।बाज ने चैंन की सांस ली।

बाज़ अपने चोंच में दबा कर उस रंगीन वस्तु को उठा कर अपने घोंसले की तरफ चला गया।जैसे ही वह अपने घोंसले की तरफ उड़ान भरता है, वैसे ही सामने वाले पेड़ पर एक चिड़िया दिखाई पड़ा।

चिड़िया बाज को देख कर बोली, 'नमस्कार बाज भाई' यह सुबह सुबह गुब्बारा लेकर कहां घुम रहे हो।

बाज़ ने कहा कि - क्या गुब्बारा? ये गुब्बारा क्या होता हैं?

चिड़िया हंसते हुए बोली कि आप सच में गुब्बारा के बारे में नहीं जानते हैं।

बाज ने सिर हिलाते हुए कहा कि नहीं, मैं नहीं जानता हूँ।

चिड़िया ने कहा कि यह आपकी चोंच में क्या है? लाल रंग की वस्तु को इशारा करते हुए पूछती हैं।

बाज़ खूब जोर जोर से हंसते हुए बोला 'हाँ, हाँ, हाँ', मैं नहीं जानता हूँ कि यह क्या है।मुझे तो यह एक पेड़ पर लटका हुआ मिला था।मैं तो सोचा कि यह कोई विचित्र जानवर होगा परन्तु इसमें कोई हरकत न देखकर खुशी के मारे इसे अपने साथ लेकर चला आया।

बाज़ की बात सुनकर चिड़िया हंसते हुए बोली कि यह कोई विचित्र जानवर नहीं है बल्कि यह एक "गुब्बारा " हैं।इसमें हवा भरी हुई होती है।इसके सिर पर धागा बांध कर हवा में उड़ाया जाता हैं और इस गुब्बारे के साथ खेलने में भी खूब मज़ा आता है।

बाज़ ने तुरंत कहा, " कैसे,?

चिड़िया ने तुरंत गुब्बारे के सिर पर बंधी रस्सी को पकड़ हवा में जाती है।गुब्बारा ऊपर हवा में नाचने लग जाता है।यह देखकर बाज़ अतिप्रसन्न होने लगता हैं।

बाज़ को कुछ दूर स्थान पर एक चमकती हुई मांस की हड्डी दिखाई पड़ता हैं।वह उस लाल गुब्बारे को छोड़कर मांस की हड्डी पर अपनी नजर केंद्रित कर लेता हैं।वह चिड़िया से कहता है कि," चिड़िया रानी", मेरे इस गुब्बारे का ध्यान रखना।मैं इसके साथ बाद में खेलूंगा।यह बात कहकर बाज़ वहां से उड़ कर चला जाता हैं।

अच्छा ठीक है बाज़ भाई, चिड़िया बोली।चिड़िया गुब्बारे के साथ देरी से खेलती रही।वह गुब्बारे के साथ खेल खेलकर थक भी चुकी थी।इसके बाद में वह अपने घोंसले पर चली गई इसके बाद भी बाज कई देर तक नहीं आया।यह देखकर चिड़िया परेशान हो जाती हैं।उसे याद आया कि गुब्बारे के चक्कर में उसने भोजन भी नहीं किया।भूख-प्यास के कारण उसने गुस्से में गुब्बारे को चोंच से मार दिया।जिससे गुब्बारा फूट जाता है।

'आगे क्या होगा।' यह सोच कर चिड़िया डर जाती हैं। वह फूटे हुए गुब्बारे को छोड़कर भोजन की तलाश में चली जाती हैं।

कुछ समय के पश्चात बाज़ मांस की हड्डी को चूसने के बाद उसे अपने गुब्बारे की याद आता है।वह तुरंत उड़कर उस गुब्बारे वाले स्थान पर पहुंचता हैं।उस स्थान पर पहुँचकर चिड़िया की अनुपस्थिति और फूटे गुब्बारे को देखकर बाज़ बहुत गुस्से में आग बबूला हो जाता हैं।

बाज़ तुरंत चिड़िया के घोंसले पर पहुंच जाता।वह जोर जोर से चिड़ियां को आवाज देने लगता है।मेरा गुब्बारे को तूने क्यों फोड़ा।चिड़िया अपने पेड़ के घोंसले वाले खोल में दुबकी बैठी थी।वह यह सब बात सुनकर डर जाती हैं कि कहीं वह बाज़ गुस्से में उसे मार न डाले।बाज़ यह कहकर थककर वहां से चला जाता हैं और इस घटना के बाद चिड़िया बाज़ से डरने लग जाती हैं।अब बाज़ भी चिड़िया को पकड़ने को पकड़ने में लग जाता है।तभी से उन दोनों में दुश्मनी शुरू हो जाती हैं।

नैतिक शिक्षा-क्रोध में किया गया कार्य हमेशा नई मुसीबत और संकट का ही सामना करना पड़ता है।

चीकू खरगोश और उसका बैंक (Short Moral Stories in hindi)

यह उस समय की बात है।जब सुन्दरवन के जंगलों में एक नई मुसीबत आ गई थी।सभी जंगलवासी कई दिनों से परेशान दिख रहे थे।इस परेशानी का मुख्य कारण कई दिनो से लगातार बारिश का होना।लगातार बारिश होने के कारण उनका कामकाज पूरी तरह से ठप चल रहा था।इसके अलावा सभी जानवरों को पेट भरने की भी समस्या होने लग गई थी।

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इस सुन्दरवन के जंगलों में एक चीकू खरगोश रहा करता था।वह बहुत ही चालाक और बुद्धिमान था।उसका भी सारा व्यापार बारिश के कारण नहीं चल पा रहा था।सभी जानवर अपने अपने घरों में छिपकर बैठे हुए थे।

अचानक से चीकू खरगोश को एक सुंदर सा उपाय सूझा।वह अपने माता-पिता को उपाय बताते हुए कहता है कि मां-पिताजी हमलोगों के जंगलों में इसी तरह से लगातार बारिश आते रहता है।हमलोग बारिश में छिप कर घर में बैठे रहते हैं।हमें खाने की भी किल्लत पड़ने लगती है।मेरे पास एक उपाय है "क्यों न अपने जंगल में एक भोजन बैंक" खोल दिया जाएं।इसमें सभी जानवर अपना भोजन सुरक्षित रख सके और आपदा जैसे संकट के समय इसका इस्तेमाल कर सके।

चीकू खरगोश की यह बात सुनकर उसके माता-पिता बहुत ही खुश होकर कहते हैं कि बेटा चीकू तुम्हारा यह सोच हमें बहुत ही पसंद आया लेकिन हम लोग इस जंगल के राजा नहीं है। जैसे ही बारिश खत्म होता हैं तो तुम यह उपाय जंगल के महाराज शेरसिंह को बताना।चीकू खरगोश बारिश खत्म होने का इंतज़ार करने लग गया।

जैसे ही बारिश खत्म हुआ, चीकू खरगोश जंगल के राजा के शेरसिंह के पास जाता हैं।

चीकू खरगोश जंगल के राजा शेरसिंह को नमस्कार करता है और नम्रतापूर्वक राजा से कहता हैं "महाराज मेरे पास बहुत ही सुन्दर सा एक उपाय है। 

शेरसिंह ने कहा कैसा उपाय?

चीकू खरगोश ने कहा कि महाराज बारिश के समय हमलोगो का पूरा निजी जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता हैं।हमें अपने घरों में छिपकर रहना पड़ता हैं और भी हमें भोजन की काफी किल्लत होने लग जाती हैं।मेरे पास एक उपाय है जिसमें सारे समस्या का समाधान छुपा हुआ है।

शेरसिंह ने कहा कि, "जल्दी बताओ"

चीकू खरगोश कहता है कि महाराज हमलोग इस जंगल में एक Bhojan Bank खोल देते हैं।जिसमें सभी जानवर अपना अपना भोजन सुरक्षित रख सके ताकि आपदा के समय इसका इस्तेमाल कर सके।इससे सारे जंगलवासी सुखमय जीवन को व्यतीत कर सके।

शेरसिंह को चीकू खरगोश का उपाय काफी अच्छा लगा।अन्य जानवरों को भी यह विचार काफी पसंद आया।अंतिम में चीकू के सुझाव और महाराज के आदेश के अनुसार जंगल में एक भोजन बैंक खूल जाता हैं।

जंगल का राजा शेरसिंह ने चीकू खरगोश को उस भोजन बैंक का मैनेजर के रूप चयनित करते हैं और चौकीदार के तरह मंकी बन्दर को चुना जाता हैं।Bhojan Bank के खुलने के बाद सुन्दरवन के सभी जानवर भालु, हाथी, लोमड़ी, ऊंट, चींटी, भेड़िया इत्यादि जानवरों ने भोजन बैंक में अपना खाता खुलवाने के लिए जाते हैं।

मिठु तोताराम अपना मिर्च लाता हैं तो भोलुराम अपना शहद लाता और भल्लू भेड़िया अपना गोश्त लाकर रखता।इसी तरह सभी जानवर भोजन सामग्री के कुछ न कुछ सामग्री को रखने के लिए लाते हैं।

कुछ दिनों के बाद Bhojan Bank में चोरी होने लगी।बैंक में रखी सामानों की चोरी दिन प्रतिदिन बढ़ने लग जाते हैं।इससे जानवरों की परेशानी बढ़ने लग गई।इस चोरी का मामला शेरसिंह के दरबार में पहुंचा।

शेरसिंह ने चीकू खरगोश को बुलाया और पूछा कि तुम भोजन बैंक के मैनेजर हो और फिर भी चोरियां कैसे हो रही है।चीकू खरगोश ने महाराज शेर सिंह से क्षमा मांगा।चीकू खरगोश ने कहा कि महाराज कुछ दिनों का समय दिजिए।मैं सामानों की चोरी का पता लगाता हूं।

चीकू खरगोश वहां से चला जाता हैं।वह तुरंत भोजन बैंक में जाकर चोरी की गई सामानों का छानबीन में लग जाता हैं।भोजन बैंक पर उसे एक काले रंग का पंख मिलता हैं।चीकू खरगोश ने वह पंख को लेकर मिठु तोताराम के पास जाता हैं।मिठु तोताराम सभी तरह के पक्षियों के बारे में अच्छी जानकारीयां रखता था।जैसे ही चीकू खरगोश ने उस पंख को दिखाया।मिठु तोताराम ने तुरंत कहा कि यह पंख तो घमंडी काले गिद्ध का हैं मगर इस गिद्ध को पकड़ना काफी कठीन कार्य है।वह बहुत ही तेज गति से उड़ता है।

चीकू खरगोश ने अपना दिमाग चलाना शुरू कर दिया।उसे कुछ समय के बाद एक idea नजर आया।चीकू खरगोश चौकीदार मंकी बन्दर को अपने साथ लेकर भोलुराम के घर पर पहुंच गया।चीकू खरगोश ने भोलुराम से कहा कि, " भोलु भईया आप कुछ शहद लाकर भोजन बैंक में रखवा दिजिए।भालूराम ने सहयोग देने का वादा किया।

भोलुराम ने चीकू खरगोश के आदेश अनुसार शहद का मटका भोजन बैंक में रख दिया।चीकू खरगोश और मंकी बन्दर ने उस शहद को इकट्ठा की गई सारे भोजन पर डाल देता हैं।

चीकू खरगोश और मंकी बन्दर दोनों झाड़ियों में छिपकर घमंडी गिद्ध का इंतज़ार करने लग जाते हैं।

शाम के समय जैसे ही गिद्ध भोजन बैंक में घुसा और भोजन को लेकर जैसे ही भागने की कोशिश करता हैं तो उसका पंख शहद में चिपक गया।वह चाहकर भी अब उड़ नहीं पाता।वह निढाल होकर जमीन पर पड़ा रहा तभी चीकू खरगोश और मंकी बन्दर ने देखा कि गिद्ध बेबस होकर जमीन पर पड़ा हुआ है।चीकू खरगोश ने तुरंत ही लाल चीटियों की सेना को इशारा करता हैं और उन्होंने कुछ ही क्षणों में गिद्ध का काम तमाम कर देता हैं।उसके बाद फिर कभी बैंक में चोरी नहीं हुई।जंगल दिन प्रतिदिन तरक्की करने लगा और सभी जानवर खुशहाली से जीवन बिताने लग गए।

नैतिक शिक्षा-कठिन परिस्थिति में भी अपने विचार को सहेज कर रखें।कोई भी कार्य या उद्देश्य करने से होते हैं, सोचने से नहीं।

बंदर और गाय (Short Moral stories in Hindi)

किसी घने जंगल में एक सीधी-सादी गाय रहती थी।उसे एक बंदर बहुत परेशान किया करता था।जब कभी भी गाय नहाने के लिए तालाब में जाती थी तो बंदर उसकी पीठ पर बैठकर कूदा करता था और वह बेचारी गाय कुछ भी नहीं करती थी।जब गाय तालाब से बाहर निकलती तो बंदर पेड़ पर चढ़कर उस पर पत्थर मारा करता था।गाय अपने बच्चों की तरह समझकर बंदर को माफ़ कर दिया करती थी लेकिन बंदर की यह शैतानी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

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एक दिन जंगल के देवता प्रकट हुए और गाय से पूछा कि वह बंदर की दुष्टता को चुपचाप क्यों सहती हो।ऐसा करने से तो बंदर का साहस ओर भी बढ़ जाएगा।वह तुम्हारे और अन्य दूसरे जानवरों को भी सताने लगेगा।

गाय ने कहा कि,"बंदर शक्ति में मेरे से बहुत कम है।इसी से मैं हंस कर सब सहन कर लेती हूं।मेरे बराबर बलवान कोई ओर होता और वह ऐसा करता तो मैं उसे सबक जरूर सिखाता।

यह सुनकर जंगल के देवता बिना कुछ कहे चले गए तो गाय ने सोचा कि इस दुष्ट बंदर नादानी दिन प्रतिदिन दिन बढ़ता जा रहा है।इस शैतान बंदर को सबक सिखाना जरूरी है।इसके बल अनुसार दंड तो मिलना ही चाहिए ताकि यह दूसरों को न सताने से पहले दसबार सोचे।

जब अगले दिन गाय नहाने के लिए तालाब में उतरता है तभी बंदर अपनी आदत के अनुसार उसकी पीठ पर बैठ जाता हैं।और फिर उछल-कूद मचाने शुरू कर देता हैं।गाय इसी अवसर का इंतजार कर रही थी।उसने तुरंत पानी में डुबकी लगाना शुरू कर देती हैं और गाय तालाब के गहरे पानी की ओर जाने लग जाती हैं।बंदर पानी में डुब गया।जान बचाने के लिए वह जोरों से शोर मचाने लग जाता हैं।

जंगल के सारे जानवर उसकी दुर्दशा को देखकर हंसने लग गए।कोई भी बंदर का मदद के लिए आगे न बढ़ता हैं।बंदर पानी में बेजान-सा होने लग गया।

गाय समझ चुकी थी कि उसने बंदर को पानी से निकलती हैं और बंदर बच गया लेकिन उसकी दुष्टता सदा-सदा के लिए खत्म हो जाता हैं।

नैतिक शिक्षा-जो जैसा कर्म करता है उसे उसी प्रकार का फल प्राप्त होता है।

शरारती चिंटू बंदर (Short Moral stories in Hindi)

चिंटू बंदर जब छोटा था उसके पिताजी को शिकारियों ने बेरहम गोलियों से छलली कर दिया था।चिंटू के पिताजी के मरने के पश्चात उसकी माँ ने उसे देखभाल किया।चिंटू बंदर की मां अपने बेटे चिंटू को बड़ी लाड प्यार से पाला करती थी।चिंटू के पिताजी न होने कारण और मां के ज्यादा लाड प्यार ने चिंटू बंदर को शरारती बना दिया।

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वह दिन भर शरारती भरी कार्य किया करता था।घर में कभी किसी सामान को छिपा देता था।इस तरह उसका आदत सा बन गया था।चिंटू की मां चिंटू से हमेशा परेशान रहा करती थी।वह हमेशा चिंटू को समझाया करती थी कि बेटा शरारत न किया कर, चिंटू बार बार कहता कि मां मैं अभी छोटा बच्चा हूं।यही कहकर वह हमेशा टाल देता था।चिंटू बंदर का शरारत दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

चिंटू की मां एक दिन पकवान बना रही थी और अपने प्यारे चिंटू को समझाती है कि बेटा तुम अब बड़े हो गए हो।अब शरारत नहीं किया करते लेकिन चिंटू अपनी मां की बातों पर थोड़ा सा ध्यान नहीं देता है। 

गर्मी का समय था।चिंटू बंदर घर के पास वाले पेड़ पर उछल-कूद कर रहा था।इस तेज़ धूप में खेलने के वजह से चिंटू बंदर को गर्म हवा की लू लग जाता हैं।चिंटू की मां अपने बेटे के लिए दवाई लेने के लिए चली जाती हैं और कहती हैं कि चिंटू बेटा घर से बाहर मत निकलना, ऐसा कहते हुए दवाई लेने चली जाती हैं।

मां को जाने के तुरंत बाद वह खेलने के लिए बाहर निकल जाता है।उसे यह मालूम ही नहीं होता हैं की वह खेलते खेलते अपने घर से बहुत ही दूर निकल आया है और इधर सूर्य डूबने वाला है।यह देखकर चिंटू बंदर अपने घर की तरफ निकल जाता हैं।मगर चिंटू को घर जाते जाते अंधेरा हो जाता हैं।

चिंटू बंदर अंधेरा और जंगल को देखकर बहुत डर जाता हैं और उसी पास वाले पेड़ पर बैठ कर रोने लग जाता हैं।

उस अंधेरे में रिया बकरी अपने घर की तरफ गुजर रही थी।वह रोने की आवाज सुनकर उस पेड़ के तरफ जाती हैं और चिंटू बंदर को देखती हैं।

रिया बकरी चिंटू बंदर को रोते हुए कहती हैं कि बेटा चिंटू इतनी दूर सुनसान जंगल में क्या कर रहे हो।

चिंटू बंदर कहा कि मेरी मां घर पर नहीं थी।मैं चुपके से खेलने के इरादे से यहां पर‌ चला आया।मैं घर की तरफ लौट रहा था। अचानक अंधेरा हो गया।मुझे इस अंधेरे से बहुत डर लगता है। अगर मैं अपनी मां की बात मानता तो शायद आज यहां नहीं आता और कहकर चिंटू बंदर रोने लग जाता हैं।

रिया बकरी कहती हैं, कि घबराओ मत चिंटू मैं तुम्हारी मां की सहेली हूं।चलों मैं तुम्हें तुम्हारे घर की ओर छोड़ देता हूं।लेकिन आगे से इस बात का ध्यान रखना कि कभी भी बिना किसी को बताएं घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।तुम्हारी मां तुम्हारे लिए कितनी परेशान हो रही होगी।

चिंटू बंदर अब बिल्कुल समझ चुका था कि अगर रिया बकरी मौसी आज यहां नहीं होती तो कोई जानवर मारकर खा जाता। चिंटू बंदर और रिया बकरी आपस में बात करते हुए घर की ओर चल पड़ी।

कुछ दूर जाने के पश्चात चिंटू की मां दिखाई पड़ी।चिंटू अपने मां को देखकर उछल पड़ता हैैैै और चिंटू की मां भी अपने बेटे को देखकर उछल पड़ती हैं।चिंटू बंदर की माँ अपनी सहेली रिया बकरी को बहुत बहुत धन्यवाद करतीं हैं।चिंटू बंदर की मां अपनी सहेली रिया बकरी से कहती है कि रिया आज बहुत अंधेरा हो चुका है।आज़ मेरे घर पर आराम कर लेना और साथ ही साथ आज़ की पार्टी मेरी तरफ से, यह बात सुनकर सारे लोग हंसने लग जाते हैं।

लम्बी पूंछ वाला बंदर (Short Moral Stories in Hindi)

जंगल में बरगद के एक पेड़ पर रहने वाले एक बंदर को अपनी लंबी पूंछ पर काफी घमंड था।वह छोटी पूंछ वाले जानवरों को‌ अकसर चिढ़ाया करता था।खरगोश, बकरी, सूअर, और हाथी तक को भी चिढ़ाने से बाज नहीं आता था।

Short moral stories in hindi

वह सब से कहता-फिरता ओ खरगोश, ओ बकरी, ओ सूअर, ओ कुत्ता,‌ तेरी पूंछ छोटी, जैसे उगा हो कुकुरमुत्ता, मेरी पूंछ लंबी, जैसे राजा की सोटी, झुक-झुक करें सारे सलाम, वरना खाओ मेरी सोटी, अपनी पूंछ की सोटी को चला चलाकर वह सभी जानवरों को मारने लगता था।

उसके साथ कोई नहीं खेलता था।उसे अपना गरूर ही प्यारा था।एक दिन जब बंदर बरगद के पेड़ पर सो रहा था, तभी बड़ी जोर से आंधी आई फिर बिजली कड़कने लगती हैं और फिर एक बार बिजली‌ आकर पेड़ पर गिर जाती हैं।पेड़ धराशायी हो जाता हैं और जिससे कि आसपास आग लग जाती हैं।बंदर जान बचा कर भागा, लेकिन उस की पूंछ में आग लग जाती हैं। उसकी पूंछ जल कर भस्म हो जाता हैं।फलतः वह बिना पूंछ का हो जाता हैं।

सुबह सभी जानवरों ने बंदर को जब इस रूप में पाया तभी वे सब हंसहंस कर लोटपोट हो गए।किसी को भी बंदर की पूंछ खो जाने का थोड़ा सा भी दुख न हुआ।सभी मिलकर गाना गाने लगे "बंदर तू हो गया बिना पूंछ का,‌ कहां गया अब तेरा सोटा, जा तू छोड़ हमारा पीछा,"

पूंछ वालों में से एक बिना पूंछ का, ऐसा सुनकर बंदर को बड़ा ही शर्म आने लगा।वह शहर की तरफ भागा और मंदिर में प्रार्थना करने लगा, "अगर मेरी पूंछ लौट आई तो मैं फल चढ़ाऊंगा"

तभी मंदिर का पुजारी आ गया और बंदर को देख कर चिल्ला पड़ा, "बंदर-बंदर", बचाओ-बचाओ।

"‌पुजारी की आवाज सुनकर बंदर पूरी तरह घबरा गया और उसकी चादर खींच कर भाग गया।रास्ते में एक दर्जी की दुकान आई तभी वह बंदर दर्जी से कहने लगा, "मेरी पूंछ नहीं है. मेरी पूंछ बना दो" 

तभी दयालु दर्जी बंदर की यह बात मान जाता और बंदर से चादर लेकर उसे गोलमोल रूई भरकर बंदर की पूंछ की जगह पर लगाकर सिल देता हैं।तभी बंदर को दर्द बहुत हुआ लेकिन वह सह गया।अब जंगल में बंदर की नई पूंछ देख कर सभी पशु-पक्षी हैरान रह गए जबकि बंदर काफी खुश होता हैं।

उसे फिर शरारत सूझती और वह पहले की तरह फिर गाने लगा-"ओ खरगोश, ओ बकरी, ओ सूअर, ओ कुत्ता, तेरी पूंछ छोटी, जैसे उगा हो कुकुरमुत्ता, मेरी पूंछ लंबी जैसे राजा की सौटी, झुकझुक करो सलाम,वरना खाओ मेरे से सोटी"

तब सभी जानवर भाग गए और बंदर खुश होकर पेड़ पर चढ़ गया।उस रात बड़ी तेज वर्षा हुई।फलतः बंदर की कपड़े की पूंछ‌ भीग गई।इससे वह लटक गई और एक शाखा में फंस गई।जब वह उठा तो पूंछ टूट कर अलग हो गई।अब तो उसके दुखों का अंत नहीं था।दिन भर वह जंगल में छिपता फिरा, लेकिन छोटी पूंछ वाले जानवरों ने उसे देख ही‌ लिया।तब उसकी ऐसी गत बनाई कि वह सारी अकड़ भूल ही जाता हैं।

वह अपनी अकड़ और लंबी पूंछ के घमंड पर पछताने लगा और रोने लगा।

इससे पेड़ की शाखा गीली हो गई।वह रोता और कहता जाता, "अगर मुझे मेरी पूंछ वापस मिल जाएगी, तो मैं कभी किसी छोटी पूंछ वाले जानवर को नहीं सताउंगा" यह बात कहकर वह सो गया‌।

उसकी यह दुर्गती देखकर एक अन्य बंदर को उस पर दया आ गया।उसने सुबह बताया, "बगल वाले जंगल में एक बहुत अच्छा बंदर डाक्टर रहता है।तुम उसके पास चले जाओ, वह आपरेशन करके नई पूंछ लगा देगा।

यह जानकर वह बहुत खुश होता और तुरंत उस डाक्टर के पास जाकर नई पूंछ लगाने का अनुरोध करता हैं।डाक्टर ने वैसा ही किया।फलतः तीन-चार दिनों में उसकी नई पूंछ निकल आई। यह देख कर बंदर बहुत खुश हुआ और उछलते-कूदते अपने पेड़ पर आ गया।

सुबह बंदर की पूंछ देख कर सभी जानवर हैरान रह गए।उन की हैरानी तब और बढ़ी जब उन लोगों ने देखा कि बंदर अब बदल गया है।

बंदर ने सब को बुलाया और कहा, "ओ खरगोश, ओ बकरी, ओ सूअर, ओ भालू, तुम्हारी पूंछ छोटी जैसे खिले हों फूल,मेरी पूंछ लंबी जैसे फूलों की डाली, मैं ने तुम सब को छेड़ा, यह थी मेरी भूल"

फिर उस ने कहा, "पूंछ लंबी हो या छोटी, वह तो सब की‌ अपनी-अपनी जैसी सुंदर ही है।यह मेरी भूल थी, जो मैं अकड़ता‌ फिरता था, उस की सजा मुझे मिल गई और मेरी आंखें खुल गईं।तब सब ने एकदूसरे का हाथ पकड़ कर खूब नाचा और गाया।अब बंदर को दूसरे जानवरों के साथ खेलने का मजा आने लगा था।

नैतिक शिक्षा-किसी ने सच ही कहा है कि घमंड और अकड़ एक दिन जरूर टुटता हैं।

बसंती (Moral Stories in Hindi in Short)

एक लड़की जो बहुत सुंदर, सुशील और मासूम थी।उसका नाम बसंती था वो कक्षा सात में पढ़ती थी।पढ़ाई में बहुत कुशाग्र बुद्धि की तो नहीं थी, लेकिन फिर भी रोज विद्यालय आती थी।उसे विद्यालय आना अच्छा लगता था।मुझसे वो बहुत ही घुल गई थी।

Moral stories in hindi

टीचर के प्रति उनका स्नेह अच्छा था।अचानक से उसने कई दिनों से विद्यालय आना बंद कर दिया, पता किया तो मालूम चला कि खेत पर काम करते समय साँप के काटने से बसंती की माँ की दुःखद मौत हो गई और इस कारण से वह छोटे भाई-बहनों को संभाला करती थी और फिर उसने अपना विद्यालय छोड़ दिया।

मैंने घर जाकर बसंती को समझाया भी पर एक तो माँ के चले जाने का दुःख और दूसरा छोटे भाई बहन की जिम्मेदारी, इसलिए वह स्कूल आने के लिए राजी नहीं हुई पर समय कहाँ किसी के लिए रुका है।ऐसे ही पूरे 2 वर्ष निकल गया।जब छुट्टियों के बाद स्कूल खुले तो बसंती मेरे पास आई और उसका मन आने के लिए झटपटा रहा था लेकिन संकोच दोबारा स्कूल नहीं आ पाई।

मैंने उसे समझया कि दोबारा स्कूल में दाखिला करवा लो तो वो कहने लगी "मेरे साथ के सभी संगी साथी कक्षा नौ में चले गए" अब इस कक्षा में ही सबसे बड़ी रह जाऊंगी।लेकिन मैनें उसे समझा-बुझा कर उसका दाखिल कक्षा 8 में करवा दिया।

अब वो स्कूल आती तो कक्षा में वो सबसे बड़ी लगती, कोई उससे दोस्ती नहीं करता, पढ़ाई में भी बहुत कमजोर हो गई थी, सब भूल गई थी।हिंदी भी अटक-अटक कर पढ़ पाती, अंग्रेजी तो बहुत दूर की बात हो गई थी।सभी बच्चे उसका मजाक उड़ाने लगे तभी वह शर्मिंदा महसूस करती और उसने फिर से स्कूल आना छोड़ दिया।फिर मैं उसके घर गया और उससे बात की और समझया कि पढ़ाई उसके लिए कितनी जरूरी है और उसके बाद उसे पढ़ने की लगन लग गई।

अब वह सब को दिखा देना चाहती थी कि वो भी पढ़ सकती है और उसने मन मे ठान लिया कि कुछ भी हो, उसे तो बस पढ़ना है तो अकेले ही बेठी- बैठी पढ़ती रहती।जब सभी बच्चे आधी छुट्टी में खेलते वो कुछ न कुछ पढ़ती रहती।वो अब सब से कम बोलती, चुपचाप पढ़ती रहती।

बच्चे चाहे जितना भी चिढ़ाते मजाक उड़ाते वह किसी भी प्रतिक्रिया नहीं देती, चुपचाप बैठी अपना काम करती रहती थी।अब बसंती पढ़ाई में ठीक हो गई थी।ऐसे ही समय बीतता चला गया।

8वी की बोर्ड परीक्षा का समय आ गया था।सभी बच्चे बहुत उत्साह में थे मगर बसन्ती बहुत डरी- डरी सी थी।परीक्षा शुरू हुई तो बसंती मेरे पास आई और कहने लगी, "मैडम! मैं फेल हो गई तो मेरे पिताजी दोबारा नही पढ़ाएंगे और घर ही बैठा देंगे।ऐसा कहते हुए वह सुबक-सुबक कर रोने लगी।

मैने उसे धैर्य बंधाया और समझाया, "कुछ नहीं होगा बेटा" आराम से परीक्षा दो।कभी भी सच्चे मन से की गई मेहनत व लगन बेकार नहीं जाती है।मेरी बातों से उसे हिम्मत मिली और वह चली गई।परीक्षा शुरू हुईं और खत्म भी हो गई और जब परीक्षा परिणाम आया तो मैंने सबसे पहले बसन्ती का ही परिणाम देखा और देख कर मेरी प्रसन्नता का प्रवाह ही नहीं रहा।

बसन्ती को सभी विषयों में 'ए ग्रेड' मिला था।जिन दो विषयों में (अंग्रेजी व हिंदी) वह ज्यादा कमजोर थी उनमें ही 'ए +'मिला था।सुबह स्कूल जाते ही सबको खुश खबरी सुनाई, सभी टीचर सुनकर प्रसन्न हुए।बसन्ती को प्रधानाचार्य सर ने बुलाकर सभी बच्चों के सामने सम्मानित किया और उसकी लगन और मेहनत की मिसाल देते हुए माला पहनाई और आगे इसी तरह बढ़ते रहने का आशीष दिया।

जो बच्चे पहले बसन्ती को चिढ़ाते थे वो अब उस पर गर्व कर रहे थे और उससे दोस्ती का हाथ भी बढ़ा रहे थे।सभी बच्चों को बसन्ती से सबक मिला कि मेहनत व लगन से सब हासिल किया जा सकता है।

नैतिक शिक्षा-मेहनत और लगन से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है।

सच्चा संत (Stories in hindi with moral)

एक दिन गुरु और शिष्य‌ भ्रमण पर निकले थे।‌अनेक विषयों पर चर्चा चल रही थी।अचानक सधुओं के चरित्र का प्रसंग‌ निकला।शिष्य का प्रश्न था कि कुछ लोग‌ आँख मूंदकर साधु-संतों पर विश्वास करते थे तो कुछ लोग उन पर संदेह भी करते थे।

Moral stories in hindi

इस पर गुरु‌ का कहना था कि सारे संत एक जैसे हों ऐसा जरूरी नहीं हैं।उनमें भी कई तरह के लोग पाए जाते हैं।दोनों चलते हुए एक ऐसे इलाके में पहुंचे, जहां अनेक संतों के आश्रम थे।

‌एक जगह उन्होंने देखा कि एक साधु ध्यान‌ की मुद्रा में बैठा है। लोग आते और वहां पैसे, फल-फूल आदि रखकर चले जाते और लोगों के जाते ही वह साधु पैसे गिनने में लग जाता।गुरु ने शिष्य से कहा-देखो यह लोभी है।यह साधु बना ही इसलिए है कि धन कमा सके।गुरु और शिष्य आगे बढ़े और देखा कि एक साधु अपनी ‌कुटिया के बाहर शीर्षासन कर रहा है।

उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी।उस साधु को देख शिष्य जोर से हंसने लगा था।उसकी हंसी पर साधु को गुस्सा आ गया और उसे मारने के लिए दौड़ा।‌दोनों वहां से भागे फिर अगले आश्रम में उन्होंने देखा कि दरिद्रनारायण भोजन चल रहा है।एक साधु स्वयं अपने हाथों से गरीबों को भोजन परोस रहा था।

इस बीच एक अन्य साधु ने उसे आवाज दी तो वह उसे भी पानी देने चला गया। 

गुरु ने‌ कहा देखो तीन तरह के संत हैं।एक परम लोभी है, दूसरा साधना तो कर रहा है पर उसे क्रोध पर ही नियंत्रण नहीं है।फिर साधना का क्या मतलब है।इनको देखो इनके चेहरे पर परम निश्चितता है।चेहरे पर जरा भी अहंकार नहीं हैं।ये निर्धनों को प्रेमपूर्वक‌ खिला रहे हैं, और दूसरे साधु की सेवा भी कर रहे हैं।ये सच्चे संत हैं।

नैतिक शिक्षा-कथनी और करनी में अंतर नहीं करें।

दुध और पानी (Short Moral Stories in hindi)

किसी गांव में एक ग्वाला रहता था।उसका नाम मटकूचंद था। वह दूध बेचता था।उसके पास एक ही गाय थी।मगर जैसे जैसे उसके ग्राहक बढ़ने लगे, वह ज्यादा दूध लाने लगा लेकिन अभी भी उसके पास एक ही गाय थी।

Moral stories in hindi

एक दिन एक आदमी ने दूसरों को बताया, "मटकूचंद लालची हो गया है।वह दूध में ज्यादा पानी मिलाकर लोगों को बेचता है।उस आदमी की बात सुनकर उसके कुछ पड़ोसियों ने मटकू से दूध लेना बंद कर दिया।बाद में लोगों ने सुना कि अब मटकू दूसरे नए ग्राहकों को पहले से ज्यादा दूध बेच रहा है।

"उस की बेईमानी ज्यादा दिन नहीं चलेगी" एक औरत ने दूसरी से कहा,

मगर आजकल हम जिस आदमी से दूध ले रहे हैं।उसके दूध में भी तो मिलावट है।दूसरी बोली, 'कुछ भी हो, नया दूध वाला एक रुपया प्रति किलोग्राम कम भी तो लेता है।लेकिन धीरे-धीरे नए दूध वाले से तंग आकर सबने उससे दूध लेना बंद कर दिया।अचानक मटकूचंद ने आकर उनसे पूछा, "मेरे योग्य कोई सेवा हो तो कहना, "अब मैं रोज दो क्विटल दूध बेचता हूँ।

दो क्विटल? सभी लोगों ने आश्चर्यचकित होकर पूछा. "हां,

आप लोग दोबारा मुझसे दूध लेना शुरू कर दें तो कल से मैं ज्यादा दूध का इंतजाम कर लूंगा।मैं दूसरे गाय भैंस वालों के पास जा कर दूध खरीदता हूं और सब ग्राहकों की मांग पूरी करता हूँ।मेरी अपनी गाय का दूध तो सिर्फ मेरे परिवार के काम आता तो क्या हमने बेकार में तुम पर शक किया "यह तो आप जानें या मेरे दूध को परख कर बताएं।सुनी सुनाई बातों के कारण ईमानदार आदमी पर शक करना ठीक नहीं हैं।मैं तो सिर्फ इतना जानता हूँ कि बेहतर दूध बेचने से ही मैं तरक्की कर रहा हूं।

नैतिक शिक्षा-हमें अपना कार्य पुरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए।

मुलाकात लिंक्स बिल्ली से (Short Moral Stories in Hindi)

उत्तरी अमेरिका के जंगलों में चीकू ने एक अदभुत जंगली बिल्ली देखी, जिसके कान तीखे और लंबे बालों के जूड़े जैसे थे।उसके दोनों गालों पर भी बालों की झालर थी।उसकी टांगें साधारण बिल्ली से लंबी थीं लेकिन पूंछ छोटी सी और बालों का झुंड ही था।

Moral stories in hindi


"वाह बिल्ली मौसी, तुम्हारे तीखे कानों का क्या कहना है? चीकू उसे देखते ही बोला।

मैं बिल्लियों के समाज की एक प्रमुख प्रजाति हूँ।मेरा नाम लिंक्स है।ऐसा उसने मुझसे बताया।

चीकू ने उससे पूछा, "तुम्हारे और साधारण बिल्ली में क्या अंतर होता है? अंतर से तुम्हें क्या मतलब है? तुम अपना रास्ता देखो अन्यथा मैं तुम्हें ही मारकर खा जाऊंगी।"लिंक्स ने कठोर स्वर में कहा.

चीकू ने उस बिल्ली को खतरनाक मानकर नम्रता पूर्वक फिर से प्राथना किया।चीकू बोला बिल्ली मौसी, मैं तुमसे मिलने के लिए भारत से यहां पर आया हूँ।मैं तुम्हारा इंटरव्यू लेना चाहता था पर तुम्हारा मूड ठीक नहीं है तो मैं चला जाता हूँ।

अच्छा तो तुम इंटरव्यू लेने वाले चीकू हो, पूछो क्या पूछना चाहते हो?

चीकू ने पूछा "तुम कहां-कहां पाई जाती हो?"

"उत्तरी अमरीका में अलास्का, दक्षिणी अमरीका में

ओरेगन, संयुक्त राज्य अमरीका में हम उत्तरी क्लोरेडो में पाए जाते हैं."

"तुम खाती क्या हो?" चीकू ने लिंक्स बिल्ली से पूछा

उत्तरी अमरीका में हमारा मुख्य भोजन खरगोश है।हम उस पर इतने अधिक निर्भर रहते हैं कि वर्षों बाद जब खरगोश कम हुए तो हमारी संख्या में भी कमी आ गई।खरगोश के नाम पर चीकू को डरते देख कर लिंक्स बोली, "पर तुम डरो नहीं तुम्हें यहां कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा."

इसके बाद लिंक्स ने अपनी बात फिर शुरू की, "हम तीतर चूहे और छोटे हिरन तक को खा जाते हैं।लाल लोमड़ी के तो हम पक्के दुश्मन हैं।मौका मिलते ही उसे खा जाते हैं।

"क्या मौसी तुम्हारी चलने की रफ्तार लोमड़ी से भी अधिक तेज हैं?

हम दौड़ने में तेज नहीं हैं।खुले में तो कुत्ता भी हमसे तेज दौड़ता है पर घने जंगल में हम आराम से दौड़ते हैं।सर्दियों में मोटी बर्फ पर हम तेजी से दौड़ते हैं।" लिंक्स ने कहा.

"तुम्हारे बच्चे कितने होते हैं?" चीकू का अगला सवाल था।

"दो महीने के गर्भ के बाद हर साल बसंत ऋतु में हमारे एक से चार तक बच्चे होते हैं।कभी-कभी बच्चे जून तक भी जन्म लेते हैं।वह फिर तेजी से बढ़ते हैं और करीब एक साल तक मां के साथ ही रहते हैं।बंधन में हम करीब 11 साल तक जीते हैं।'लिंक्स का उत्तर था।

"मैंने सुना है कि सर्दियों में तुम्हारी फर काफी लंबी हो जाती है"

तुम्हारा फर किस काम में आता है?" चीकू ने पूछा

लिंक्स ने कहा "हमारा फर के बाल 2.5 सेंटीमीटर से ज्यादा लंबा होता हैं जो काफी कीमती होती है जो वस्त्र को सजाने के काम आती है।हमारे फर के लिए हजारों की संख्या में बंदी बनाए जाते हैं।हमारी फर का रंग हलका पीला, गहरा पीला और भूरा तथा काले धब्बों वाला होता है।

चीकू ने पूछा, क्या तुम्हारा मांस भी खाया जाता है?

हां, ऐसे तो बिल्ली का मांस खाया नहीं जाता, पर हमारा मांस खाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

चीकू का अंतिम सवाल "तुम्हारी कुल कितनी प्राजातियां हैं"

"लिंक्स ने जवाब दिया" हमारी दो प्रजातियां हैं।एक उत्तरी लिंक्स यानी हम और दूसरी बे लिंक्स या बोबकेट के नाम से जानी जाती हैं।हमारी यह प्राजाति दक्षिण कनाडा से मध्य मैक्सिको तक पाई जाती है।वे हमसे थोड़ी छोटी होती हैं।उनके जूड़े से कान भी थोड़े छोटे रहते हैं।उनकी खाल भी कम कीमत की होती है क्योंकि वह जल्दी टूटने वाली होती है। 

चीकू ने इंटरव्यू के लिए लिंक्स को धन्यवाद दिया और जाने की आज्ञा मांगी।

नैतिक शिक्षा-अपनी खामियां और उपयोगिता लोगों को जरूर बताएं।

जल की उपयोगिता (Short Moral Stories in hindi for Kids)

एक जंगल में पीने के पानी की बड़ी समस्या थी।जंगल के जानवरों के अनुरोध पर शेर ने जगह जगह Handpump और नल लगवाये थे।जंगल में पानी को व्यवस्था अच्छी होने लगी।जंगल में कुछ शरारती जानवर ऐसे थे जो रात के वक्त पूरा नल खोल दिया करते थे।इससे दूर दूर तक पानी बहता रहता लेकिन बहते हुए पानी पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता हैं।सभी आपमे काम पर busy रहते थे।

short moral stories in hindi for kids


एक दिन सामने वाले गाँव का गधा जंगल में अपने मित्र से मिलने आता हैं।उसने देखा जंगल में तमाम नलों से पानी बह रहा है।गधे ने तुरंत सारे नलों को बन्द किया।जंगल के कुछ जानवर और उनके बच्चे ने गधे की हँसी उड़ाने लगे और कहने लगे, ये तो बहुत कंजूस दिखता है।

जानवर ने कहा "ऐसा मालूम होता है, इसके गाँव में पानी की काफी किल्लत है तभी तो इसने जंगल के सारे नल को बंद कर दिया।

लेकिन उस समय गधे ने किसी से कुछ भी न कहा।इधर जैसे ही वह गधा अपने मित्र के घर पहुँचता हैं तभी कुछ जानवरों ने फिर से नल खोल दिया।कुछ देर बाद दुबारा गधा अपने मित्र के साथ जंगल के नजारा को देखने को निकलता हैं।उसने सारे नलों को फिर से बंद करता और अपने मित्र से कहने लगता है की जंगल के जानवर पानी की कद्र करना नहीं जानते।

मित्र ने जवाब देते हुए कहा कि पानी बहुत तुच्छ चीज है।इसकी क्या कद्र करे।

हाँ पहले तो फिर भी पानी की समस्या थी लेकिन अब तो राजा साहब की कृपा से जगह जगह नल ही नल हैं।गधे ने कहा, पानी को इस तरह बहाना अच्छी बात नहीं।

गधे ने कहा, इसका जवाब मैं आज शाम को राजा साहब की चौपाल लगेगी तब बताऊंगा।शाम को चौपाल लगेने के बाद वह गधा भी वहा पहुँचता और शेर को प्रणाम कर बोला "महाराज, मैं आपको एक जरूरी सुझाव देना चाहता हूँ।

आपके सुझाव का स्वागत है।"शेर ने कहा"

गधे ने कहा, आपके जंगल में पानी की कोई कीमत नहीं है।जगह जगह नल हर समय बहते रहते हैं।उन्हें बन्द नहीं किया जाता।यदि इस जंगल के प्राणियों का रवैया यही रहा तो आने वाले दिनों में जल संकट फिर से गहरा हो सकता है।अतः नलों को फालतू न बहने दिया जाय।पानी की जितनी आवश्यकता हो उतना ही उपयोग करें।

ये बात और है की यदि नलों के नीचे नालियाँ बना दी जाए तो गंदे पानी को एकत्रित कर उससे खेती भी किया जा सकता है।इससे गरीब जानवरों को फायदा मिलेगा।नाली के अभाव में जमीन मे हर वक्त नमी रहती है।इससे गंदगी फैलती है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता है जो मलेरिया जैसे कई और खतरनाक बीमारीयो का hotspot बना‌ सकता है।

यह सुनते ही शेर आश्चर्यचकित लगा और उसने जंगल में एक कानून बनाया।जिसके बाद पानी का उपयोग आवश्यकतानुसार किया जाने लगा।इसके बाद शेर ने गधे को धन्यवाद देते हुए कहा तुमने हमें जो सुझाव दिया हैं उसे हम और हमारे जंगल वासी कभी नहीं भूलेंगे।

अब जंगल के सभी जानवर पानी की उपयोगिता का सही अर्थ समझ चुके थे।

नैतिक शिक्षा-जल एक बहुमूल्य रत्न हैं।इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।

कौन सही? राजा या मंत्री (Short stories in hindi with moral)

बहुत समय पहले की बात है।बुन्देलखंड में एक राजा रहता था। एक समय की बात हैं जब एक अंग्रेज की कुछ ग़लती पर राजा को अत्यधिक गुस्सा आया और राजा ने उसे फांसी की सज़ा सुना दी।अंग्रेज़ यह सुनकर बहुत ज्यादा घबरा गया।जब उसकी कोई बात को भी राजा ने अनसुना किया तो उसने गुस्से में राजा को इंग्लिश में गालियां देने लगा।

Short stories in hindi with moral

राजा उसकी कोई भी बात को समझ नहीं पाता हैं क्योंकि राजा को इंग्लिश नही आता था।राजा के एक मंत्री अंग्रेज़ी जानते थे। राजा ने उस मंत्री से पूछा बताओ ये क्या कह रहा हैं?

मंत्री‌ कहते है- "राजा साहब ये क्या कह रहे है आप।बड़े लोग अपने आक्रोश को पी जाते हैं और दोषियों को माफ़ कर देते है।" 

राजा को मंत्री की यह बात सुनकर काफी दया आ जाता हैं।तभी उन्होंने अंग्रेज़ को माफ़ कर देते हैं और उसे आज़ाद करने का आदेश दे देते हैं।एक दूसरा मंत्री भी अंग्रेज़ी जानता था।

उसने राजा से कहा "राजा साहब‌ हमलोग आपका नमक खाते है और वफ़ादारी करना हमारा फ़र्ज़ है।जो बात जिस तरह हो वैसे ही बताया जाना चाहिए।

"राजा ने कहा- तुम क्या कहना चाहते हो मंत्री?

"सरकार ये अंग्रेज़ आपको गालियाँ दे रहा था।राजा ने मंत्री की यह बात सुनकर मंत्री की तरफ़ से अपना मुँह फेर लेता हैं और कहा आपके सच से उसका झूट ही बेहतर है।

नैतिक शिक्षा-बड़े बुजुर्गों भी कहते है की जिस झूठ से किसी की जान बच जाय और दिलो में प्रेम उत्पन्न हो जाए तो सच से बेहतर झूठ ही है।बस उसका‌ उद्देश किसी की भलाई ही हो।

गाय और बाघ (Cow and Tiger Short Moral stories in hindi)

एक दिन जंगल के पास एक गाय घास चर रही थी।उसपर बाघ की नज़र पड़ती हैं।बाघ ने गाय को जोरों से दौड़ाया, गाय दौड़ने लगी और दौड़ते दौड़ते गाय एक दलदल में जाकर फस जाती थी।

Cow and Tiger Moral stories in hindi

बाघ भी उसी‌ दलदल में जाकर फस गया लेकिन बाघ गाय से कुछ दूरी पर रह जाता हैं।गाय ने बाघ से कहा कि तू तो अब गया अब तुझे कोई नही बचा पाएगा।बाघ ने कहा कि तू भी तो गई तुझे कौन बचाएगा।शाम होने पर जब गाय घर नही पहुंची तो उसका मालिक गाय को‌ खोजते हुए दलदल के पास पहुंचा और रस्सी, लकड़ी की सहायता से‌ गाय को बाहर निकाल कर उसकी प्राण बचाई लेकिन बाघ को‌ बचाने कोई नही आया।

नैतिक शिक्षा-बच्चों आपको पालने और देखने वाले आपके माता-पिता और शिक्षक होते हैं यदि आप उनका कहना मानेंगे और उनका सम्मान करेंगे तो आप कभी भी मुसीबत में नही फंसोगे।

दो मछली और एक मेंढक की मित्रता (Short Stories in hindi with moral for class 1)

दो बड़ी मछलियां सहसराबुद्धि और सताबुद्धि दोनों एक बड़े तालाब रहते थे।दोनों की एक मेंढक एकाबुद्धि दोस्त के साथ दोस्ती थी।तीनों एक तालाब में काफी समय तक वक्त बीताते थे।एक शाम में वो तीनों उस तालाब में इकट्ठा हुए।तीनों ने देखा कि कुछ मछवारे अपने हाथ में जाल और बड़ी सी टोकरी लिए सामने से आ रहे थे और उनके पास ढेर सारी मछलियां भी थी। तालाब के पास से गुजरते समय वे लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे।ये तालाब तो मछलियों से भरा हुआ है।

Short Stories in hindi with moral for class 1

उनमें से एक मछवारे ने कहा कि कल सुबह से हम यहां मछलियां पकड़ने आएंगे।तालाब ज्यादा गहरा नहीं है दूसरे दिन वे उस तालाब में आने के लिए तैयार हो गए।

मेंढक मछवारों की बात सुनकर दुखी हो जाता हैं।उसने अपने मछली दोस्तों से कहा की अब हमें बचने के उपाय ढूंढने पड़ेंगे। हमें यहाँ से भागना पड़ेगा या फिर छिपना पड़ेगा।मछलियों को इस बात से ज्यादा चिंता नहीं हुई।

एक मछली ने दूसरी मछली से कहा की अब कुछ नहीं होगा।वे मछवारे तो बस ऐसे ही बातें कर रहे थे।वे यहां नहीं आएंगे। अगर आ जाते हैं तो मुझे पता है की मैं उनसे भी कैसे निपट लूंगी।मेरे पास काफी सारे उपाय हैं।मैं तुम्हे और खुद को आसानी से बचा लूंगा।

दूसरी मछली ने भी यही कहा कि वो भी अपनी और परिवार की जान बचाने में सक्षम है।दोनों मछलियां एक दूसरे के सपोर्ट में आ गई हैं।दोनों ने कहा कि वे चंद मछवारों की वजह से अपने पुर्वजों का घर छोड़कर नहीं जाएंगी लेकिन मेंढक ने नहीं माना।उसने बोला कि वो अपने परिवार को लेकर कल सुबह होने से पहले ही किसी और तालाब में चले जाएंगे।दूसरे दिन सुबह मछवारे आए और उन लोगों ने अपने बड़े-बड़े जाल बिछाए।तालाब से मछली केंकड़े, कछुआ और मेंढक पकड़ रहे थे।दोनों मछलियां बचने की कोशिश करती रही लेकिन बच नहीं पाए।उनकी एक भी चालाकी काम नहीं आई।

मछवारों ने उन्हें पकड़ लिया और जब जाल में उन्हें दबोचा तो वे मर चुकी थी।मछवारे इतनी बड़ी दो मछलियां पकड़कर बहुत खुश और गर्वित थे।वे सबको दिखाकर घर जा रहे थे।इसी बीच मेंढक को रहने के लिए एक अच्छा जगह मिल गया था। लेकिन वो अपने दोस्तों के लिए डरा हुआ था।फिर जब उसे अपने दोस्त की मौत के बारे में पता चला वो दुखी हो गया।

मेंढक परिवार से कहने लगा की उनके पास काफी हुनर था लेकिन जिस हुनर की उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी वही उनके पास नहीं था।लेकिन मेरे पास वही एक हुनर था।मैं अपने परिवार के साथ ही रहना चाहता हूं और खुश हूं।

नैतिक शिक्षा-हमें अपने हुनर और अक्ल का सही उपयोग करना चाहिए।

शिक्षा ही सर्वोत्तम धन है (Short Moral story in Hindi for class 3)

एक दिन एक राजा जंगल में अपना रास्ता भटक जाता हैं।उसी जंगल में उस राजा को तीन बालक दिखाई देते हैं।बालक ने राजा के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करता हैं जिससे राजा बहुत खुश हो जाता हैं।

राजा ने उनसे कुछ मांगने के लिए कहते हैं।सबसे पहले बालक ने बड़े से घर की मांग उठाया।दूसरे ने अच्छे खान पान के लिए बहुत सा धन मांगा।तीसरे बालक ने कहा महाराज यदि आप मुझे कुछ देना चाहते है तो मेरे लिए उचित शिक्षा व्यस्था कर दें।राजा ने सब को उनके मांग के अनुसार व्यवस्था कर दी।

कुछ समय बीतने के बाद, पहला बालक का घर बाढ़ में बह जाता हैं, दूसरे का धन खत्म हो जाता हैं और वह भी गरीब हो जाता हैं और तीसरे बालक शिक्षित होकर राजा के महल में मंत्री बन जाता हैं।

नैतिक शिक्षा-यदि हम ज्ञान कि तरफ बढ़ेगे तो एक अच्छा‌ परिणाम हमारा पीछा करेगा। तुम्हारे पास भी ज्ञान रूपी धन आ जाएगा वह कभी ख़त्म नहीं होगा न ही कोई इसे बांट पायेगा।

बातूनी चम्पु बंदर (Short Moral Stories in Hindi for 4)

रबी नाम का एक शहर था।शहर से कुछ दूरी पर एक जंगल था जिसमें लल्लू नाम गधा और चिकू नाम खरगोश रहा करते थे।चिकू खरगोश बाहर शहर में एक कम्पनी में मैनेजर के पद पर काम करते थे।रविवार का समय था जब चीकू खरगोश घर का साफ सफाई का काम कर रहा था।तभी उसके दरवाजे पर लल्लू गधा आता हुआ दिखाई देता हैं।

लल्लू गधा ने चिकू खरगोश से कहा कि मेरे दोस्त मुझे शहर में कुछ जरुरी काम है।तुम्हारे पास कम्पनी के द्वारा दी हुई कार है। तुम मुझे शहर तक छोड़ दोगे।शाम तक घर लौट आयेंगे।

चिकू खरगोश ने कहा कि आज छुट्टी है घर पर बहुत सारे काम है।तुम जानते हो कि मुझे सिर्फ सप्ताह में एक ही दिन का छुट्टी मिलता है।मैं उस दिन घर की साफ सफाई का कार्य करता हूँ।क्या हम दूसरे दिन नहीं जा सकते हैं।

लल्लू गधे ने अपने मित्र चिकू से कहा कि मित्र मेरे चाचा जी अचानक से बिमार पड़ गए हैं।उनको शहर में देखकर हालचाल पूछकर अपने जंगल वापस लौट आएंगे।मुझे शहर घूमे बहुत दिन हो चुका है।हमलोग साथ में खूब मस्ती करेंगे।

चिकू खरगोश ने कहा ठीक हैं।दोनों घर का सारा काम करने के बाद वे लोग शहर की ओर रवाना हो जाते हैं।शहर का रास्ता पथरीला था।घना कोहरा भी छाया हुआ था।जंगल के शहर जाते वक़्त चिकू खरगोश ने अपने कार के हेडलाइट जला कर आराम-आराम से गाड़ी चला ही रहा था तभी कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद चिकू ने देखा कि सामने से कोई कारवाला उन्हें रोकने के लिए हाथ दे रहा था।

लल्लू गधा कहा कि यह कौन है जो बीच सड़क पर खड़ा होकर हाथ मार रहा है।चिकू ने अपना कार को रोका और बाहर की ओर देखा तो चम्पू बंदर सड़क किनारे खड़ा दिखाई दिया।लल्लू ने पूछा कि चम्पू तुम यहाँ क्या कर रहे हो।

चम्पू बंदर ने कहा कि मैं तुम्हारी मामी से मिलने जा रहा हूं। लेकिन क्या बताऊं सुबह से कोई सवारी ही नहीं मिल रहा है।

चिकू ने कहा कि ठीक है कार में बैठ जाओं और बताओं कि तुम्हें कहा जाना है।चम्पू बंदर ने कहा यही पास में कुम्हु स्थान है और वहां से 4 किलोमीटर पैदल चलने के बाद मेरा गांव है। चिकू खरगोश बड़ा ही होशियार था।उसने कहा कि देखों चम्पू हम तुम्हारे इस स्थान का पता नहीं जानते लेकिन कुम्हु आते ही कार को रुकवा देना।कोहरे का समय है।अपने नज़र को बाहर नजर बैठाएं रखना।

चम्पू कहा कि 'ठीक है - ठीक है।मेरा तो रोज का आना-जाना होता है।मैं वहाँ पर कार रुकवा दूंगा।

चम्पू स्वभाव से बड़ा ही बातूनी बंदर था।उसे शांत बैठना बिल्कुल भी पसंद नहीं था।वह चिकू और लल्लू से पूछा कि तुम दोनों कहाँ तक जा रहे हो।लल्लू ने कहा की हम शहर जा रहे हैं। फिर चम्पू ने पूछा 'किसी काम से?'

चिंकू(Chinku) गुदगुदाते हुए कहा कि तुम्हें इससे क्या मतलब।चम्पू(Champu) कुछ समय तक शांत रहा और पुनः लल्लू गधे से कहा कि क्या बताऊं भैया मुझे कल प्रिया(Priya) बकरी से मुलाक़ात हुआ।मैंने अपने लाडले के रिश्ता के लिए उससे बात किया था।मेरा बेटा शहर से M.B.A किया हुआ है।उसे बहुत ही मेहनत से पढ़ाया हूँ।मैं सोचा कि अपने बेटे की शादी बड़े ही धूमधाम से करवाऊंगा लल्लू(Lallu) गधा उसके हां में हां मिलाता रहा था।

चिकू(Chiku) खरगोश ने कहा की तुम्हारी ज्यादा बोलने की आदत अभी तक नहीं गई।चम्पू(Champu) ने कहा की ज्यादा बोलने से मुझे बहुत हल्का महसूस होता है।कुछ समय के बाद चिकू(Chiku) खरगोश ने सड़क किनारे लगी एक बोर्ड को ध्यान से पढ़ा तो उसपर पूनागढ़ नाम लिखा था।चिकू(Chiku) ने कहा कि देखों पूनागढ़ भी आ गया, तुम्हारा कुमहू(Kumhu) अब कितनी दूर है।

चम्पू(Champu) ने जोर से कहा कि ‘कार रोको कार रोको।हम बहुत दूर आ चूके हैं।कुम्हु(Kumhu) तो कब का पार हो चुका।लल्लू(Lallu) गधा ने कहा कि, "कब से हम बोल रहे थे कि बाहर भी देखना, तुम तो बातें करने पर ही लगे थे।

चम्पू(Champu) बंदर ने कहा - 'दोस्त मुझे माफ़ कर दो, आपस फिर से दोबारा कुम्हु छोड़ दो।चिकू(Chiku) ने कहा, 'बिल्कुल नहीं।तुम्हारी यही सज़ा है कि यहां से तुम पैदल अपने गांव जाओ।अब बातूनी चम्पू(Champu) बंदर की यही सजा मिल गया।चम्पू(Champu) सोचने लगा

ज्यादा बातें करने वाला हमेशा पछताता है।

नैतिक शिक्षा-इस कहानी से हमें यही सीख मिलता है कि हमें अपनी बातों का कम से कम उपयोग करना चाहिए।

मकड़ी और उसके जाले (Short moral stories in hindi for class 5)

यह कहानी है एक मकड़ी की।यह मकड़ी(spider) एक बार अपना जाला(net) बनाने का सही स्थान ढूंढ रही थी।वह एक ऐसा स्थान चाहती थी जो ऐसी जगह जाला बनाए जहां ढेर सारे कीड़े-मकोड़े और मक्खियां आकर फंस जाए।इस तरह उसका जीवन मजे से बीतता रहे, यही वह सोचने लगी।मकड़ी(spider) को एक घर में एक कोना बेहद पसंद आ गया।उसने उस जगह जाला बनाने की तैयारी करना शुरू कर दिया।उसने वहां जाला बनाना शुरू कर दिया और तभी वहां से एक बिल्ली(Cat) गुजरी और मकड़ी(spider) को देखकर जोर-जोर से हंसने लगी।

मकड़ी(Spider) ने जब बिल्ली(Cat) से उसके हंसने का कारण पूछा तब बिल्ली(Cat) ने कहा कि मैं हंस रही हूं तुम्हारी वेबकूफी पर, घर साफ-सुथरा है तुम्हें दिखाई नहीं देता है।यहां तुम्हारे जाल में कोई नहीं फंसेगा क्योंकि यहां कोई कीड़े-मकोड़े और मक्खियां ही नहीं हैं।जब बिल्ली(Cat) ने यह बात सुनी तो उसने जाला बनाने का विचार त्याग दिया।साथ ही उसने दूसरी जगह तलाशना भी शुरू कर दिया।उसने घर के बरामदे में लगी एक खिड़की देखी और वहां जाला बनाना शुरू कर दिया।जब उसने आधा जाला बना लिया उसके बाद एक चिड़िया आकर उसकी हंशी उड़ाने लगा।

चिड़िया ने कहा कि तेज हवा आने पर तुम्हारा यह जाला उड़ जाएगा।तो यहां जाला क्यों बुन रही हो।मकड़ी ने चिड़िया की बात सुनी औऱ यह बात सही भी लगी।उसने खिड़की(Window) पर भी जाला(Net) बुनना बंद कर दिया।वह फिर से दूसरा स्थान ढूंढने लगी।तभी उसकी नजर एक पुरानी अलमारी(Almirah) पर पड़ती हैं।उस अलमारी का दरवाजा खुला था।मकड़ी(spide) ने वहां जाकर जाला बुनना शुरू कर दिया।इसी बीच वहां एक coakroach पहुँचा।उसने कहा कि यहां जाला बनाना बेकार है।यह बहुत पुरानी अलमारी(Almirah) है।कुछ ही दिन में यह almirah बिक जाएगा और मकड़ी तुम्हारी मेहनत बेकार हो जाएगी।

मकड़ी ने cockraoch की बात भी मान ली।उसने फिर से दूसरा स्थान खोजा लेकिन इसमें पूरा दिन निकल गया था।वह थक जाती हैं और भूख-प्यास से बेहाल थी।उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह फिर से जाला बना पाए।थककर वह एक जगह पर बैठ जाती हैं।यहां पर एक चींटी(Ant) बैठी थी।मकड़ी को देख चींटी ने कहा कि वो उसे सुबह से देख रही है।जैसे ही तुम जाला बुनना शुरू करती हो वैसे ही कोई आकर तुम्हें कुछ कहता है और तुम अपना काम आधा छोड़ देती हो।दूसरों की बातों में आकर ही तुम्हारा यह हाल हुआ है।चींटी की यह बात सुनकर मकड़ी को अपनी गलती का अहसास हुआ।वह अपनी वेबकूफी पर पछताने लगी।

नैतिक शिक्षा-कई बार ऐसा होता है कि हम कुछ भी नया काम शुरू करते हैं तो नकारात्मक मानसिकता के लोग आते हैं और हमें हतोत्साहित करने लग जाते हैं।लोग हमारे हौंसले को तोड़ने लगते हैं।इन सभी बातों में आकर हम अपना काम बीच में ही छोड़ देते हैं।इससे समय निकल जाता है और हम पछताते रह जाते हैं।ऐसे में जब भी हम कोई नया काम शुरू करें तो पूर्ण सोच-विचार कर करें और उसके बाद आत्मविश्वास और दृढ़-निश्चय के साथ काम में लग जाएं।

साहसी बालक (Short moral stories in hindi for class 6)

आज मैंने ऐसे बच्चे की अद्भुत कहानी का वर्णन किया गया है जो हमारे आज के युग के बच्चों के लिए प्रेरणा के साथ नैतिक सीख भी प्रदान करेगी और बच्चों को जीवन में खुद को प्रेरित करती हैं।

वह साहसी बालक बचपन से ही ईमानदार और सच्चाई के मार्ग पर अटूट खड़ा हुआ रहा है।वह अपने महान लक्ष्य सदा सत्य के मार्ग पर ही चलकर ही प्राप्त किया हैं।         

यह कहानी अध्यापक और उनके बीच के एक साहसी छात्र की है।

एक समय की बात है गाँव के किनारे पर एक विद्यालय था। विद्यालय में पढ़ने के लिए छात्र और छात्राएँ जाया करते थे। एक दिन विद्यालय में अध्यापक गणित की क्लास के बच्चों को पढ़ा रहे थे।क्लास को खत्म होते ही अध्यापक महोदय ने एक गणित का प्रश्न अपने सभी छात्र छात्राओं को हल करने के लिए दे दिये। और कहे कि बच्चों यह प्रश्न परीक्षा के समय आने की संभावना है।तुम्हें इसे घर से हल कर के लाना है।

अगले दिन अध्यापक(teacher) महोदय ने काँपी को जाचना शुरू किया तो पाया कि सभी विद्यार्थीयों का प्रश्न का उत्तर सही नहीं है।जब एक विद्यार्थी का कापी को जांचा तो पाया की उसका उत्तर सही है।जिसका नाम गोपाल था।

गोपाल ने प्रश्न का उत्तर इतना सही दिया था कि

अध्यापक(teacher) महोदय गोपाल का प्रंशसा करने लग गये।वही पर गोपाल अपनी प्रंशसा(smile) को सुनकर रोने लग जाता है।रोते हुए गोपाल को देखकर अध्यापक(teacher) महोदय को आश्चर्यचकित हो जाते हैं।उन्होनें गोपाल को अपने पास बुलाते हैं और रोने का कारण पूछते हैं।

गोपाल ने रोते हुए कहा कि - इस प्रश्न का उत्तर मैंने नहीं लिखे हैं बल्कि वह मेरे बड़े भाई ने लिखे हैं।अपनी झूठी प्रंशसा(happiness) को सुनकर मुझे बहुत दुःख हो रहा है।और इसलिए मेरे आँखों में आँसू आ गए।इस बात को सुनकर अध्यापक(teacher) महोदय गोपाल की सच्चाई से अति प्रसन्न हो जाते हैं और गोपाल को गले से लगा लेते हैं।

अध्यापक(teacher) महोदय कहते हैं कि गोपाल एक दिन तुम अवश्य ही अपना और अपने देश का नाम अभिभान से ऊँचा करोगें।

आप जानते हैं उस साहसी बालक का क्या नाम था ?

उस छोटे से साहसी बालक(brave boy) का नाम था - गोपाल कृष्ण गोखले।गोपाल कृष्ण गोखले(Gopal krishna gokhle) एक स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी(socialist) थे।इन्हें भारत का ' ग्लेडस्टोन ' भी कहा जाता है।गोखले को गाँधीजी अपना "राजनीतिक गुरु " मानते थे।गोपाल कृष्ण गोखले एक सच्चे देशभक्त थे।इन्होनें बिटिश साम्राज्य(British Emperror) के खिलाफ लड़ाई भी लड़ी और आगे चलकर गोपाल कृष्ण गोखले एक महान नेता बने थे।

नैतिक शिक्षा-इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा सच्चाई के मार्ग पर ही चलना चाहिए।सदा सत्य बोलने व्यक्ति ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है।

प्रेम ही सच्ची भक्ति (Short moral stories in hindi for class 7)

आज की प्रेरणादायक कहानी ईश्वर(God) और उनके एक सच्चे भक्त पर आधारित है।संतों(Saint) और विद्वानों(Scientist) का भी यही कहना है कि ईश्वर(God) का पाने का सबसे उत्तम मार्ग है कि उनके प्रति अटूट प्रेम और आस्था रखना चाहिए।भगवान प्रभु का प्रेम(love) पूर्ण समर्पण से ही पाया जाता है।चलिए इस छोटी सी Moral and Motivational  Stories को पढ़ते है।

किसी गाँव में एक लड़की रहती थी।लड़की(Girl) के माता-पिता उसे बचपन(Childhood) में ही छोड़कर चल बसे थे। वह गांव के तालाब(pond) के पास छोटी सी कुटिया(Cottage) में रहा करती थीं।उस गाँव(Village) के बाहर स्वामी जी का आश्रम था।वह लड़की(girl) नित्य प्रतिदिन स्वामी का प्रवचन सुनने जाया करती थी और आश्रम में जितने प्रकार के कार्य होते थे उसमें में वह लड़की अपनी कर्तव्य जरुर निभाती थी।

स्वामी जी उस लड़की के छोटी सी उम्र में इतना साहस भरा कार्य को देखकर अति प्रसन्न रहते थे।जब आश्रम में सभी काम खत्म हो जाया करते थे।वह लड़की अपने घर की तरफ लौट जाती थी।

एक दिन वह लड़की स्वामी जी आश्रम में गईं।स्वामी जी को आदर सत्कार करने के बाद कहा कि, "स्वामी महाराज आप ईश्वर के परम भक्त हैं" मैं आपके द्वारा दी हुई सभी आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन(Life) में अपनाया हूं। मेरे माता-पिता बचपन में ही छोड़कर चले गए और नहीं मेरा कोई भाई हैं।जब मैं अपने गांव की ओर लौटती हूं तो सारा बच्चा मुझे अनाथ कहकर चिढ़ाते थे।

स्वामी जी हस्ते हुए कहें कि यह दुनिया का वास्तविक सत्य(truth) है जिसके पास जो चीजें रहती हैं जैसे धन या परिवार मनुष्य उसका आदर(respect) कभी भी नहीं करता है लेकिन वही चीजें नहीं होने पर उन्हें अकेला महसूस होता है।

स्वामी जी ने उस लड़की को कृष्ण भगवान(God) की एक मूर्ति दिए और कहें कि यह तुम्हारा छोटा भाई हैं।इसे तुम लालन-पालन करना।जब भी तुम्हें घर पर अकेला(alone) महसूस हो अपने भाई(brother) से बातचीत करना।वह तुम्हारी हर संकट में मदद करेंगे।

वह लड़की भगवान कृष्ण की मूर्ति को लेकर अपने घर चली जाती है।गांव(Girl) के सभी बच्चों को कह कह कर दिखाती थी कि देखों मेरा भाई आया है। और गांव के बच्चे उस लड़की पर हंसते थे और कहते हैं कि इस पत्थर के मूर्ति को यह पगली अपना भाई समझती है। लड़की बिना किसी को कहें घर में चली गई।

बाल गोपाल की मूर्ति को वह नित्य सुबह उठती उस मूर्ति को नहाती, भोजन कराती और जब अकेली बैठती तो उस मूर्ति से सारा समय बातचीत करती।

एक समय वह मूर्ति को लेकर अपने घर के बाहर बैठकर खेल रही थी। और गांव के कुछ शरारती बच्चे ने उस लड़की से कहा कि तुम्हें नहीं मालूम गांव में एक भेड़िया आया हुआ है और छोटे छोटे बच्चों को लेकर चला जाता है और उन्हें मारकर खा जाता है। और तुम अपने छोटे भाई का ख्याल रखना। इतना कहकर शरारती बच्चे वहां से चले जाते हैं।

लड़की ने अपने बाल-गोपाल की मूर्ति को अपने कुटिया मे विराजमान किया और अपने भाई से कहा कि, घबराओं मत, मैं तुम्हारी रक्षा करुंगी। वह तुरंत दरवाजे पर पहरा देने लग जाती हैं।

अपने छोटे भाई को जंगली भेड़िया से बचाने के लिए वह दिन रात भूखी उसी तरह खड़ी रही। भगवान कृष्ण ऊपर से अपने नन्हे भक्त को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रहे थे।लड़की(Girl) की अटूट आस्था और विश्वास को देखकर भगवान कृष्ण ने एक छोटे-से बालक का रूप धारण किया और पृथ्वी लोक पर उस लड़की के पास चलें आए।

वे लड़की के घर के पास खेलने लगें और कहें कि तुम भी आओं बहन एक साथ खेलेंगे।लड़की ने कहा कि नहीं मैं अपने भाई की रक्षा कर रही हूं।गांव के बच्चे ने कहा है कि जंगल से गांव में कोई भेड़िया आया हुआ है।तब छोटे लड़के ने कहा कि, "यह मिथ्या झूठ है गांव में कोई भेड़िया(sheep) नहीं आया हुआ है।गांव(Village) के बच्चे ने तुम्हारे साथ शरारत किए हैं।

भगवान कृष्ण अपने स्वयं रूप में आ गए और लड़की(God) से अटूट प्रेम और आस्था को देखकर उसको अपने निज धाम ले गए।स्मरण रखिए प्रभु(God) को पाना है तो उनके प्रति अपने मन में भक्ति, सेवा सत्कार, निष्पक्ष प्रेम भावना रहना चाहिए।जब हम पूरी तरह निर्मल होकर अपनी पवित्रता और शांति स्थापित करें तो एक दिन निश्चय ही हम उनकी की दर्शन जरुर पा सकते हैं।

पत्थर और शिल्पकार की कथा (Short moral stories in hindi for class 8)

हमारे जीवन को अच्छा बनाने के लिए हमारे माता-पिता और गुरूजन बहुत ही ज्यादा परिश्रम का सामना करते हैं। इसके लिए वो हमें डांट और फटकार लगाते हैं।यह डांटना और फटकारना, हमारा जीवन उत्तम बने इसके लिए बहुत जरूरी है।आज हम आपको पत्थर और शिल्पकार की कहानी के बारे में बता रहे हैं।

एक नगर में एक Craftsman(शिल्पकार) रहता था।एक दिन वह यात्रा पर गया। यात्रा से थककर वह एक छायादार पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए रूका।वहां पर उसे एक पत्थर दिखाई दिया। उसके मन में उसे तराशने की इच्छा जाहिर हुई। वह stone(पत्थर) पहले से ही सुदंर दिखाई दे रहा था।शिल्पकार ने अपने थैले से अपना औजार (छेनी-हथौड़ी) निकालकर उसे तराशने के लिए जैसे ही उसपर पहला चोट किया...पत्थर जोर से चीख कर बोला मुझे मत मारो।दूसरी चोट पर वह रोने लगा और चिल्लाते हुए कहा कि मत मारो मुझे..मत मारो।

शिल्पकार(Craftsman) ने उस रोते पत्थर के विनय को मानते हुए उसे छोड़ दिया।शिल्पकार(Craftsman) ने वहां पड़े एक दूसरे पत्थर(stone) को उठाया और उसे तराशना शुरु कर दिया।वह पत्थर चुपचाप(silently) छेनी और हथौड़ी की चोट सह रहा था।शिल्पकार(Craftsman) ने देखते ही देखते उस पत्थर को एक देवी का रूप दे दिया।पत्थर अपने इस नये आकार से बहुत खुश हुआ।शिल्पकार(Craftsman) ने उस प्रतिमा को पेड़ के नीचे छोड़कर आगे बढ़ गया।

कई वर्षों के बाद वह शिल्पकार(Craftsman) वापस उसी जगह से गुजरा।उसने देखा कि उसके छेनी और हथौड़े की चोट सहने वाले पत्थर को पूजा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रोने की वजह से जिस पत्थर को फेंक दिया था, उस पर लोग नारियल फोड़ रहे थे।पहले पत्थर पर चढ़ाने के लिए, जिसे अब पूजा जा रहा था।

शिल्पकार(Craftsman) ने मन ही मन सोचा कि जीवन में कुछ बनने के लिए हमें अपने शिल्पकार (माता-पिता और गुरुर) की डांट और फटकार को सहना चाहिए।इससे हमारे जीवन में बदलाव आता है और हम जीवन में तरक्की करते हैं।तभी आगे जाकर दुनिया हमारा सम्मान करती है।

Commander और Bench की कहानी (Hindi Short stories with moral)

कुछ समय पहले की बात है।एक कैंप में नए Commander की पोस्टिंग हुई।निरक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि कैंप के मैदान में दो सिपाही एक Bench की पहरेदारी कर रहा था कमांडर ने सिपाहियों से पूछा कि तुम सब इस बेंच की पहरेदारी क्यों कर रहे हो।कमांडर की इस बात को सुनकर सिपाहियों ने बोला कि पता नहीं सर लेकिन आपसे पहले वाले कमांडर ने हमे इस बेंच की देखभाली करने को कहा था।सिपाहियों ने आगे बात को बढ़ाते हुए कहा कि शायद इस कैंप की परंपरा होगी क्योंकि इस बेंच की पहरेदारी पूरे 24 घंटे होती है।

सिपाहियों की बात सुनकर तत्कालीन commander ने पूर्व वाले commander को फोन करके उस बेंच की पहरेदारी करने का कारण पूछा।पहले वाले commander ने जवाब दिया कि मुझे नहीं पता।उनहोने पहले वाले कमांडर को उस बेंच की पहरेदारी करवाते देखा था।बस मैंने भी उसी पंरपरा को कायम रखा।नए कमांडर आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि उसे कारण का पता नहीं चला पाया।कमांडर ने इसी तरह पिछले 4 कमांडरों से फ़ोन पर बात किया परंतु सबका जवाब एक जैसा ही था।

इतिहास को पता लगाते लगाते आखिरकार commander की बात एक Retired general से हुई।कमांडर ने रिटायर्ड जनरल को फोन किया और माफी मांगते हुए बोला कि मैं कैंप का नया कमांडर हूं और 60 साल पहले आप इसके कमांडर हुआ करते थे।Commander ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा की सर यहां एक बेंच है जिसकी पहरेदारी 24 घंटे की जाती है।क्या आप मुझे इस बेंच के विषय में कोई जानकारी बता सकते हैं।

Commander की बात खत्म होते ही सामने से आश्चर्यजनक स्वर में आवाज आया।

क्या उस बेंच का paint अभी तक नहीं सूखा है क्या?

जनरल की इस बात को सुनने के बाद commander को सारे मामलो के बारे में विस्तार से पता चल गया।

जीवन में कोई भी काम शुरू करने से पूर्व उसके विषय में अच्छे से जान लेना अतिआवश्यक है।इससे पंरपरा के नाम पर अंधविश्वास का पर्दाफाश होता हैं और हम कुछ चीज़ों के शिकार भी नहीं होते हैं।

नैतिक शिक्षा-व्यक्ति को तार्किक होना चाहिए।किसी भी चीज का अनुयायी बनने से पहले उसके इतिहास और हकीकत को जानना बहुत जरूरी होता है। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताएंगे।

Short Moral Stories in Hindi Video



FAQs on Moral Stories in hindi

Moral stories का hindi में क्या अर्थ होता हैं?
Moral stories उन stories को बोलते हैं जिसमें हमें जीवन की नैतिकता का अनुभव कराता हैं।हमें यहाँ बताया जाता हैं कि जीवन में किस तरह से जीना चाहिए।

क्या हमें moral stories in hindi पढ़ना चाहिए?
जी हाँ, हमलोगों को moral stories in hindi जरूर पढ़ना चाहिए।Moral stories हमें जीने के तरीके के बारे में बताता हैं।

Top 10 moral stories in hindi कौन सा है?
दस सबसे बेहतरीन moral stories in hindi के नाम कुछ इस तरह हैं।
  • Commander और Bench की कहानी
  • पत्थर और शिल्पकार की कहानी
  • साहसी बालक की कहानी
  • मकड़ी और उसके जाले
  • बातूनी चंपू बंदर
  • शिक्षा ही सर्वप्रथम धन हैं।
  • Lynx बिल्ली को कहानी
  • कौन सही? Raja या Mantri
  • जल की उपयोगिता
  • दूध और पानी

अच्छे अच्छे Moral stories in hindi कहा मिलेगा?
अच्छे अच्छे moral stories के collection की पूरी लिस्ट को यहाँ पर discuss किया गया हैं।आप पढ़कर काफी मजा आएगा।

सबसे best moral story in hindi कौन सा हैं?
Commander और Bench की कहानी सबसे best moral story हैं।

Conclusion

आज हमलोग इस article में moral stories in hindi से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण stories यहां पर प्रस्तुत करने की कोशिश किए हैं।इस article को पढ़ने के बाद जीवन के moral और principle के बारे में एक अच्छा ज्ञान मिला होगा।

इन कहानियों को खासकर के बच्चों को पढ़ना चाहिए।यहाँ जितने भी moral stories का विश्लेषण किया गया हैं वो सारे के सारे बच्चों को जीवन की नैतिकता और सही राह प्राप्त करने में मदद करेगा।

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